गायत्री माता की आरती – Gayatri Mata Ki Aarti – ज्ञानदीप और श्रद्धा की बाती

आरती श्री गायत्री जी की – सार (भावार्थ)

श्री गायत्री जी की आरती ज्ञान, श्रद्धा और शुद्ध भक्ति का दिव्य संदेश देने वाली पावन आरती है। इसमें गायत्री माता को ब्रह्म-शक्ति और सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी के रूप में नमन किया गया है। यह आरती साधक को आंतरिक शुद्धता, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

आरती के प्रारंभ में कहा गया है कि गायत्री माता की आरती ज्ञान रूपी दीपक और श्रद्धा रूपी बाती से की जाती है। जब भक्ति ही घी बनकर जलती है, तब साधना पूर्ण होती है। इसका भाव यह है कि केवल बाहरी पूजा नहीं, बल्कि ज्ञान और श्रद्धा से युक्त भक्ति ही माता को प्रिय है।

आगे बताया गया है कि भक्त का मन ही थाल बनता है। जब मन पवित्र और निर्मल होता है, तभी उसमें देवी की दिव्य ज्योति प्रज्वलित होती है। यह दर्शाता है कि गायत्री माता की कृपा पाने के लिए मानसिक शुचिता अत्यंत आवश्यक है।

आरती में यह भी कहा गया है कि जब भक्त शुद्ध मनोरथ और सच्चे भाव से पूजा करता है, तब आरती का घंटा स्वयं ही कल्याण का नाद करता है। ऐसे भक्त की प्रार्थना शीघ्र स्वीकार होती है और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

गायत्री माता की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जिनके सामने तीनों लोकों का वैभव भी फीका प्रतीत होता है, वही माता गायत्री हैं। यह पंक्ति दर्शाती है कि गायत्री साधना से मिलने वाला आत्मिक ज्ञान और शांति संसार के किसी भी भौतिक सुख से कहीं अधिक श्रेष्ठ है।

आरती में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो भक्त श्रद्धा से गायत्री माता की आराधना करता है, उसके जीवन में संकट कभी निकट नहीं आते। उसके भाग्य में सुख और संपदा की रेखा स्वतः बन जाती है। माता अपने साधकों की हर प्रकार से रक्षा करती हैं।

अंत में भक्त यह संकल्प करता है कि वह प्रेम और नियम के साथ गायत्री माता की आरती करेगा और उनके ब्रह्ममयी स्वरूप का ध्यान करेगा। ऐसी साधना से जीवन में सद्बुद्धि, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

सार रूप में

श्री गायत्री जी की यह आरती हमें सिखाती है कि सच्ची पूजा बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि ज्ञान, श्रद्धा, शुद्ध मन और प्रेमपूर्ण अनुशासन से होती है। इसका नियमित पाठ मन को पवित्र, बुद्धि को तेजस्वी और जीवन को सत् मार्ग पर अग्रसर करता है।
जय माँ गायत्री! 🌼🙏

गायत्री माता की आरती – Gayatri Mata Ki Aarti – आरती श्री गायत्री जी की

आरती श्री गायत्रीजी की।
ज्ञानदीप और श्रद्धा की बाती।
सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

मानस की शुचि थाल के ऊपर।
देवी की ज्योत जगै, जहं नीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा।
बाजैं करै आसुह ही की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

जाके समक्ष हमें तिहुं लोक कै।
गद्दी मिलै सबहुं लगै फीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

संकट आवैं न पास कबौ तिन्हें।
सम्पदा और सुख की बनै लीकी॥

आरती श्री गायत्रीजी की।

आरती प्रेम सौ नेम सो करि।
ध्यावहिं मूरति ब्रह्म लली की॥

आरती श्री गायत्रीजी की।


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ॐ भूर्भुवः स्वः—जय माँ गायत्री! 🌼🙏

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