कूर्म भगवान की आरती – Kurma Bhagwan Ki Aarti

कूर्म भगवान की आरती – सार (भावार्थ)

कूर्म भगवान की आरती भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार – कच्छप अवतार की महिमा, धर्मरक्षा और योग-तत्व का अद्भुत वर्णन करती है। आरती की शुरुआत में भगवान को सदा धर्म के रक्षक और भक्तों की लाज बचाने वाले रूप में नमन किया गया है। यह भाव दर्शाता है कि कूर्म अवतार केवल सागर मंथन के सहायक ही नहीं, बल्कि संसार में धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा करने वाले परम कृपालु हैं।

आरती में बताया गया है कि वे सत्यनारायण के अवतार हैं और विष्णु के ही दिव्य रूप में प्रकट हुए। जब देवताओं की शक्ति क्षीण हो गई और असुरों का प्रभाव बढ़ने लगा, तब भगवान ने सागर मंथन का उपाय दिया। उन्होंने अपने विशाल कच्छप स्वरूप में मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया, जिससे मंथन संभव हो सका। यह प्रसंग सिखाता है कि ईश्वर असंभव को भी संभव बना देते हैं, जब धर्म संकट में होता है।

वासुकि नाग को मथनी बनाकर देवता और दानव मंथन में लगे और समुद्र से चौदह रत्नों का प्राकट्य हुआ, जिनमें अमृत सबसे श्रेष्ठ उपहार था। इससे यह संदेश मिलता है कि धैर्य, परिश्रम और सहयोग से जीवन में अमृत समान फल प्राप्त होते हैं। आगे आरती में कहा गया है कि भगवान ने ऋषियों को धर्म का ज्ञान बाँटा और एकादशी व्रत की परंपरा चलाकर भक्तों को संयम, उपवास और भक्ति का मार्ग दिखाया।

इस आरती का विशेष पक्ष इसका योग और आध्यात्मिक रहस्य है। कूर्म भगवान को मूलाधार चक्र के अधिष्ठाता बताया गया है। “मूल बंध” और “प्राण-अपान” का उल्लेख यह दर्शाता है कि यह अवतार केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि कुण्डलिनी योग और ब्रह्मचर्य साधना से भी जुड़ा है। श्वास-प्रश्वास को देव-दैत्य के रूप में समझाकर जीवन को सागर मंथन की तरह साधने की प्रेरणा दी गई है, जिससे कुण्डलिनी जाग्रत हो और साधक निष्काम भाव से आगे बढ़े।

आरती में यह भी कहा गया है कि इस योग साधना से लक्ष्मी, अमृत, स्वास्थ्य, शांति और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। कूर्म अवतार को कर्मयोग का महान ज्ञानी बताया गया है, जो हमें सिखाते हैं कि धीरे-धीरे, धैर्यपूर्वक और निष्ठा से किया गया कर्म अंततः साधक को अंतिम लक्ष्य और मोक्ष तक पहुँचा देता है। “पाँच कर्म, पाँच ज्ञान और पाँच इंद्रियों को वश में करने” का संदेश आत्मसंयम और आत्मनियंत्रण का महत्व बताता है।

अंत में खीर का भोग, निर्धनों और पशुओं को अन्नदान करने का विधान हमें सेवा, करुणा और दान की शिक्षा देता है। जो भक्त श्रद्धा से यह कूर्म आरती पढ़ता है, उसे संसार में सम्मान, खोई हुई वस्तुओं की प्राप्ति और अंत में कूर्म भगवान की शरण मिलती है।

समग्र रूप से यह आरती हमें धर्म, कर्मयोग, योगसाधना, भक्ति और सेवा का समन्वय सिखाती है। यह बताती है कि भगवान कूर्म न केवल सृष्टि के सहायक हैं, बल्कि जीवन को संतुलित, संयमित और आध्यात्मिक बनाने के महान गुरु भी हैं।

कूर्म भगवान की आरती – Kurma Bhagwan Ki Aarti

ॐ जय कच्छप भगवान, प्रभु जय कच्छप भगवान।
सदा धर्म के रक्षक, भक्त का राखो मान।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

सत्यनारायण के अवतारा, पूर्णिमाँ तुम शक्ति
विष्णु के तुम रूपक, द्धितीय ईश शक्ति।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

घटी जब देवो की शक्ति , तब सागर मंथन दिया उपाय
मंद्राचल पर्वत को थामा, कच्छप पीठ अथाय।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

वासुकि को मथनी बनाया, देव दैत्य आधार।
चौदह रत्न मथित हो निकले, अमृत मिला उपहार।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

चतुर्थ धर्म ऋषियों को बांटा, विश्व किया कल्याण।
एकादशी व्रत को चलाया, भक्तों को दे ज्ञान।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

महायोग का रहस्य है प्रकट, कच्छप मूलाधार भगवान।
मूल बंध लगा कर, चढ़ाओ अपने प्राण अपान।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

श्वास प्रश्वास देव दैत्य है, इनसे मंथन सागर काम।
सधे जीवन ब्रह्मचर्य, जगे कुंडलिनी बन निष्काम।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

चौदह रत्न इस योग मिलेंगे, लक्ष्मी अमृत स्वास्थ अपार।
नाँद शांति आत्म ज्ञान हो, कर्मयोग कूर्म अवतार।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

इष्ट देव तुम कुर्मी जाति, सनातन द्धितीय अवतार।
कर्मयोग के तुम हो ज्ञानी, दिया कर्मठता व्यवहार।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

पँच कर्म ज्ञान कच्छप अवतारा, पँच इंद्री कर वशीभूत।
सदा रहो स्वं आवरण, ज्यों सिमटे कच्छप कूप।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

धीरे धीरे कर्म करो सब, राखों कर्मी ध्यान।
अंत लक्ष्य पर पहुँचे साधक, पचा कर्म फल मान।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

खीर प्रसाद बनाकर, ईश कच्छप भोग लगाय।
स्वान और निर्धन बांटो, दे पूर्णिमाँ मन वरदाय।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।

जो पढ़े ज्ञान आरती कच्छप, पाये जगत सब मान।
मिले सभी कुछ खोया, अंत शरण हो कूर्म भगवान।।

ॐ जय कच्छप भगवान।।


यदि कूर्म भगवान की आरती का यह सार आपके मन में भक्ति और शांति का भाव जगा पाया हो, तो कृपया नीचे टिप्पणी में अपनी श्रद्धा और अनुभव अवश्य लिखें। इस पावन आरती को अपने परिवार, मित्रों और सभी भक्तजनों के साथ साझा करें, ताकि धर्म, कर्मयोग और भक्ति का यह दिव्य संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे। आपकी सहभागिता से यह आध्यात्मिक यात्रा और भी मंगलमय बनेगी। 🙏🐢

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