बगलामुखी माता की आरती – सार (भावार्थ)
बगलामुखी माता की आरती माँ बगलामुखी के उस दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप का स्तवन है, जो शत्रुओं की शक्ति को स्तंभित करने वाली, भय का नाश करने वाली और साधक को आत्मबल प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। यह आरती भक्ति, रक्षा और विजय का संदेश देती है तथा जीवन में स्थिरता, शांति और सफलता का मार्ग दिखाती है।
आरती के आरंभ में माँ बगलामुखी की जय-जयकार करते हुए भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित करता है। माता के पीत वस्त्र उनके शरीर पर अत्यंत शोभायमान हैं, जो पीताम्बरा शक्ति, ज्ञान और विजय के प्रतीक हैं। उनके कुंडलों की अनुपम छवि माता के तेज और सौंदर्य को और बढ़ा देती है।
आगे माता के कर-कमलों में मुद्गर (गदा) का वर्णन मिलता है, जो यह दर्शाता है कि वे नकारात्मक शक्तियों, शत्रु भाव और अधर्म को नियंत्रित करने वाली देवी हैं। उनकी आराधना केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि स्त्री-पुरुष सभी करते हैं, क्योंकि माँ सभी की रक्षक और कल्याणकारी हैं।
माता के गले में चम्पक पुष्पों की माला लहराती है और देवता, मनुष्य तथा मुनि—सभी उनकी जय-जयकार करते हैं। उनकी भक्ति से त्रिविध ताप (आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक कष्ट) स्वतः ही शांत हो जाते हैं। इस प्रकार माँ बगलामुखी की भक्ति को सदा सुख देने वाली बताया गया है।
आरती में माँ को सृष्टि की पालनकर्त्री, संहारकर्त्री और सृजनकर्त्री के रूप में स्वीकार किया गया है। वे सम्पूर्ण जगत और समस्त जीवों की रखवाली करती हैं। जो लोग अज्ञान और मोह की रात्रि में भटक रहे होते हैं, उनके हृदय में माँ बगलामुखी ज्ञान का प्रकाश भर देती हैं।
माँ को अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाली, ज्ञान को बढ़ाने वाली और असुरों का दमन करने वाली अम्बे कहा गया है। वे संतों को सदा सुख देती हैं और सभी जीवों को प्राणों से भी प्रिय हैं, क्योंकि वे जीवन की रक्षा करने वाली शक्ति हैं।
जो भक्त माँ के चरणों में ध्यान लगाता है, उसके सभी भव और भय दूर हो जाते हैं। प्रेमपूर्वक की गई माँ बगलामुखी की आरती साधक को मोक्षधाम का अधिकारी बना देती है—यानी यह आरती केवल सांसारिक लाभ ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग खोलती है।
अंत में दोहे के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि जो कोई भी बगलामुखी माता की आरती पढ़ता या सुनता है, उसकी सभी विनतियाँ पूरी होती हैं और उसके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
सार रूप में
बगलामुखी माता की यह आरती रक्षा, विजय, ज्ञान और मोक्ष का पावन संदेश देती है। यह साधक को नकारात्मक शक्तियों से निर्भय बनाकर आत्मबल और स्थिर बुद्धि प्रदान करती है। श्रद्धा और प्रेम से किया गया इसका पाठ जीवन में बाधाओं को दूर कर सुख, शांति और सफलता की प्राप्ति कराता है।
जय जय श्री बगलामुखी माता! 🌼🙏
बगलामुखी माता की आरती – Baglamukhi Mata Ki Aarti
जय जय श्री बगलामुखी माता, आरति करहुँ तुम्हारी।
पीत वसन तन पर तव सोहै, कुण्डल की छबि न्यारी॥
कर-कमलों में मुद्गर धारै, अस्तुति करहिं सकल नर-नारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…।
चम्पक माल गले लहरावे, सुर नर मुनि जय जयति उचारी॥
त्रिविध ताप मिटि जात सकल सब, भक्ति सदा तव है सुखकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…।
पालत हरत सृजत तुम जग को, सब जीवन की हो रखवारी॥
मोह निशा में भ्रमत सकल जन, करहु हृदय महँ, तुम उजियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…।
तिमिर नशावहु ज्ञान बढ़ावहु, अम्बे तुमही हो असुरारी॥
सन्तन को सुख देत सदा ही, सब जन की तुम प्राण पियारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…।
तव चरणन जो ध्यान लगावै, ताको हो सब भव-भयहारी॥
प्रेम सहित जो करहिं आरती, ते नर मोक्षधाम अधिकारी॥
जय जय श्री बगलामुखी माता…।
॥ दोहा ॥
बगलामुखी की आरती, पढ़ै सुनै जो कोय।
विनती कुलपति मिश्र की, सुख-सम्पति सब होय॥
यदि आपको बगलामुखी माता की आरती का यह सार भक्तिपूर्ण और उपयोगी लगा हो, तो कृपया कमेंट में अपनी श्रद्धा व्यक्त करें। इसे अपने परिवार व मित्रों के साथ शेयर करें, ताकि माँ बगलामुखी की कृपा और शक्ति का संदेश सभी तक पहुँचे। 🌼✨