अन्नपूर्णा माता की आरती – Annapurna Mata Ki Aarti

अन्नपूर्णा माता की आरती – सार (भावार्थ)

अन्नपूर्णा माता की आरती माँ अन्नपूर्णा के उस करुणामय और सर्वपालक स्वरूप की स्तुति है, जो सृष्टि को अन्न, शक्ति, शांति और संतुलन प्रदान करती हैं। यह आरती माँ को बार-बार प्रणाम करने की भावना से भरी है और यह स्पष्ट करती है कि जिनका स्मरण और ध्यान अन्नपूर्णा माता में नहीं लगता, उन्हें जीवन में सच्चा विश्राम और तृप्ति प्राप्त नहीं हो सकती।

आरती की शुरुआत में भक्त माँ अन्नपूर्णा को बार-बार प्रणाम करता है, क्योंकि वे ही जीवन की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली हैं। अन्नपूर्णा माता का ध्यान करने से मन, शरीर और आत्मा—तीनों को संतोष मिलता है। उनके बिना न तो जीवन की गति चल सकती है और न ही कर्मों में स्थिरता आ सकती है।

आगे बताया गया है कि अन्नपूर्णा देवी का नाम लेने मात्र से सभी कार्य सिद्ध होने लगते हैं। उनका नाम इतना प्रभावशाली है कि वह प्रलय, युगों और जन्म-जन्मांतरों तक बना रहता है। इससे यह भाव प्रकट होता है कि माँ अन्नपूर्णा कालातीत हैं और उनकी कृपा हर युग में समान रूप से फलदायी है।

आरती में यह भी दर्शाया गया है कि देवताओं की रचना और व्यवस्था भी माँ की शक्ति से ही संभव है। कृष्ण और राम जैसे अवतार भी उसी परम शक्ति की अभिव्यक्ति हैं। ब्रह्मा, विष्णु और शिव—तीनों देवता माँ के चरणों में नतमस्तक हैं। ब्रह्मा (चतुरानन) उनके चरणों को चूमते हैं, विष्णु (चक्रधर श्याम) उनकी महिमा का गुणगान करते हैं और शिव (चंद्रचूड़) उनके सेवक रूप में सुशोभित होते हैं। यह माँ अन्नपूर्णा की सर्वोच्च सत्ता को दर्शाता है।

आरती में माँ को दयामयी और शरणागत वत्सल कहा गया है। जब देवता और मानव दयनीय स्थिति में होते हैं, तब वे “दया-दया” कहकर माँ को पुकारते हैं। माँ अन्नपूर्णा अपने शरण में आए भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें आश्रय देती हैं। उनका धाम स्वयं शरण और सुरक्षा का प्रतीक है।

अंतिम पंक्तियों में माँ के बीज मंत्रों और शक्तियों का स्मरण किया गया है—श्रीं, ह्रीं, ऐं, क्लीं—जो समृद्धि, श्रद्धा, विद्या, शांति और निष्काम वरदान के प्रतीक हैं। माँ अन्नपूर्णा न केवल भौतिक अन्न देती हैं, बल्कि आत्मिक तृप्ति, मानसिक शांति और दिव्य कांति भी प्रदान करती हैं।

सार रूप में

अन्नपूर्णा माता की यह आरती हमें यह सिखाती है कि माँ केवल अन्न की दात्री नहीं, बल्कि जीवन, संतोष, करुणा और शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनका स्मरण करने से भूख केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन और आत्मा की भी शांत होती है। इस आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ जीवन में समृद्धि, संतुलन और आंतरिक तृप्ति प्रदान करता है।
जय माँ अन्नपूर्णा! 🌾🙏

अन्नपूर्णा माता की आरती – Annapurna Mata Ki Aarti

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,कहां उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारे,लेते होत सब काम॥

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती,कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,चारु चक्रधरश्याम।
चन्द्र चूड़ चन्द्रानन चाकर,शोभा लखहि ललाम॥

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

देवी देव दयनीय दशा में,दया दया तव नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,शरण रूप तव धाम॥

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।

श्रीं, ह्रीं, श्रद्धा, श्रीं ऐं विद्या,श्रीं क्लीं कमल काम।
कान्तिभ्रांतिमयी कांति शांतिमयीवर देतु निष्काम॥

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।


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जय माँ अन्नपूर्णा! 🙏🌾

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