1. परिचय (क्या है अक्षय तृतीया?)
साल का वह सबसे शुभ दिन, जब सूर्य और चंद्रमा दोनों अपनी पूरी कला में हों, जब धरती पर देवताओं की वर्षा होती है, और जब किया गया हर अच्छा काम अटूट फल देने वाला होता है – यह है अक्षय तृतीया।
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे लोकप्रिय नाम “आखा तीज” से भी पुकारा जाता है। यह तिथि इतनी शक्तिशाली मानी जाती है कि इसे बिना मुहूर्त निकाले कोई भी शुभ कार्य करने के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।
क्या है ‘अक्षय’ का रहस्य?
सबसे पहले समझते हैं इस त्योहार के नाम का गहरा अर्थ। संस्कृत के ‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है – “जो कभी समाप्त न हो”। यानी वह अनंत, अमिट और अटूट स्रोत।
इस दिन की मान्यता बहुत सरल लेकिन अद्भुत है – अक्षय तृतीया के दिन जो भी दान, पुण्य, जप या तप किया जाता है, वह कभी खत्म नहीं होता। उसका फल जन्मों-जन्मांतर तक साथ रहता है। यही कारण है कि इस दिन को अन्नदान, वस्त्रदान, विद्यादान और गौदान का विशेष महत्व बताया गया है।
केवल खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आस्था का उत्सव
अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ सोने-चांदी की खरीदारी के दिन के रूप में जानते हैं, लेकिन यह केवल सतही दृष्टिकोण है। इस तिथि का आध्यात्मिक पक्ष कहीं अधिक व्यापक और जीवन बदलने वाला है।
यह वह दिन है, जब:
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भगवान परशुराम ने धरती पर जन्म लिया था।
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माता गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं।
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भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा को दरिद्रता से मुक्ति दिलाई थी।
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पांडवों को अक्षय पात्र (अटूट भोजन देने वाला बर्तन) की प्राप्ति हुई थी।
क्यों जरूरी है इस दिन का सदुपयोग?
ज्योतिष की दृष्टि से भी यह तिथि अद्वितीय है। इस दिन सूर्यदेव अपनी उच्च राशि मेष में होते हैं और चंद्रदेव अपनी उच्च राशि वृषभ में। साथ ही, तृतीया तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संगम जीवन में स्थिरता, धन और शांति लाने वाला माना जाता है।
सरल शब्दों में समझें: जैसे बीजारोपण का सही समय मिलने पर एक छोटा सा बीज विशाल वृक्ष बन जाता है, वैसे ही अक्षय तृतीया के दिन किया गया एक छोटा सा दान या पुण्य अनंत गुना होकर आपके पास लौटता है।
इसलिए, यह केवल एक तारीख नहीं है – यह आपके संकल्पों, अच्छे कर्मों और समृद्धि की अटूट ऊर्जा का महापर्व है। आइए, इस दिन को सिर्फ धन संचय का दिन न समझें, बल्कि आत्म-संचय और पुण्य-संचय का दिन बनाएं।
2. अक्षय तृतीया 2026: पूजा मुहूर्त और सभी शुभ समय (तालिका सहित)
अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस वर्ष रविवार, 19 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 10:49 ए एम से दोपहर 12:45 पी एम तक रहेगा। इस मुहूर्त की कुल अवधि 1 घंटा 57 मिनट है। शास्त्रों के अनुसार, तृतीया तिथि का प्रारम्भ 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 ए एम से हो जाएगा, और इस तिथि का समापन 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7:27 ए एम पर होगा। चूँकि इस दिन को ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है, अतः आप पूरे दिन कोई भी शुभ कार्य – जैसे पूजा, दान, गृह प्रवेश, सोना-चांदी की खरीदारी या नए व्यवसाय का शुभारंभ – कर सकते हैं। तथापि, सर्वाधिक फलदायी समय सुबह 10:49 ए एम से दोपहर 12:45 पी एम के बीच का ही माना गया है। इस समय में की गई पूजा और दान अक्षय (अटूट) फल देने वाले होते हैं।
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| पर्व का दिन | रविवार, 19 अप्रैल 2026 |
| पूजा मुहूर्त (प्रारम्भ) | सुबह 10:49 ए एम |
| पूजा मुहूर्त (समाप्त) | दोपहर 12:45 पी एम |
| कुल अवधि | 01 घंटा 57 मिनट |
| तृतीया तिथि प्रारम्भ | 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 ए एम |
| तृतीया तिथि समाप्त | 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 ए एम |
विशेष नोट:
चूँकि अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है, अतः आप पूरे दिन कोई भी शुभ कार्य – पूजा, दान, गृह प्रवेश, सोना-चांदी की खरीदारी, नए व्यवसाय का शुभारंभ, विवाह या सगाई – कर सकते हैं। तथापि, सर्वाधिक फलदायी समय सुबह 10:49 ए एम से 12:45 पी एम के बीच ही माना गया है।
अक्षय तृतीया 2026: शुभ मुहूर्त (तालिका)
| क्रम | मुहूर्त / योग | प्रारम्भ समय | समाप्ति समय | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 04:54 ए एम | प्रातः 05:39 ए एम | जप, ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम |
| 2 | प्रातः संध्या | प्रातः 05:17 ए एम | प्रातः 06:25 ए एम | स्नान, संध्या वंदन और गायत्री जाप |
| 3 | त्रिपुष्कर योग | प्रातः 07:10 ए एम | प्रातः 10:49 ए एम | अत्यंत दुर्लभ योग, हर कार्य फलदायी |
| 4 | अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:20 पी एम | दोपहर 01:11 पी एम | सबसे शुभ और निर्दोष मुहूर्त |
| 5 | विजय मुहूर्त | दोपहर 02:52 पी एम | दोपहर 03:43 पी एम | विजय और सफलता प्रदान करने वाला |
| 6 | गोधूलि मुहूर्त | सायं 07:05 पी एम | सायं 07:28 पी एम | दान, तर्पण और पितरों के लिए शुभ |
| 7 | सायाह्न संध्या | सायं 07:06 पी एम | सायं 08:14 पी एम | दीपदान, आरती और संध्या पूजा |
| 8 | निशिता मुहूर्त | रात्रि 12:22 ए एम (20 अप्रैल) | रात्रि 01:08 ए एम (20 अप्रैल) | रात्रि में विष्णु पूजा और व्रत के लिए |
| 9 | अमृत काल | रात्रि 02:26 ए एम (20 अप्रैल) | रात्रि 03:52 ए एम (20 अप्रैल) | दान, जप और पुण्य कार्य अमृत फल देते हैं |
| 10 | रवि योग | प्रातः 04:35 ए एम (20 अप्रैल) | प्रातः 06:24 ए एम (20 अप्रैल) | अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग |
विशेष टिप्पणी:
- खरीदारी (सोना/चांदी/वाहन) और गृह प्रवेश के लिए – अभिजित मुहूर्त (12:20 PM – 01:11 PM) सर्वोत्तम है।
- पूजा, जप और दान के लिए – ब्रह्म मुहूर्त (04:54 AM – 05:39 AM) अथवा त्रिपुष्कर योग (07:10 AM – 10:49 AM) उत्तम रहेगा।
- नया व्यवसाय या निवेश शुरू करने के लिए – विजय मुहूर्त (02:52 PM – 03:43 PM) शुभ फल देता है।
3. पूजा विधि और नियम (इसे कैसे करें?)
अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ का दर्जा रखता है। इस दिन की गई पूजा, जप, दान और अन्य शुभ कर्म अक्षय (अटूट) फल देते हैं । लेकिन केवल पूजा कर लेना ही पर्याप्त नहीं है – इस दिन विधि-विधान और शुद्ध भावना का विशेष महत्व है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि इस पावन अवसर पर पूजा कैसे करें और किन नियमों का पालन करना चाहिए।

प्रातःकालीन दिनचर्या (स्नान और संकल्प)
स्कन्द पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है ।
विधि इस प्रकार है:
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ब्रह्म मुहूर्त में जागरण – सुबह 4:00 से 5:00 बजे के बीच उठें। यह समय आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम होता है ।
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गंगा स्नान का महत्व – यदि संभव हो तो गंगा नदी या किसी पवित्र तीर्थ में स्नान करें। भविष्य पुराण के अनुसार, वैशाख तृतीया पर गंगा स्नान करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है । यदि गंगा निकट न हो, तो घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
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पीले वस्त्र धारण करें – अक्षय तृतीया पर पीले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। पीला रंग श्रीविष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, साथ ही यह समृद्धि और उल्लास का प्रतीक है ।
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संकल्प – स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें। मन में यह भाव रखें कि आज मैं विधि-विधान से श्रीलक्ष्मी-नारायण की पूजा करूंगा, दान-पुण्य करूंगा, जिससे मेरा जीवन धन-धान्य और सुख-समृद्धि से भरपूर हो।
पूजा स्थल की तैयारी (वेदी और आसन)
पूजा के लिए घर के मंदिर या किसी स्वच्छ स्थान पर एक चौकी या मंच रखें। इस पर पीले या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं – ये दोनों रंग शुभता और ऊर्जा के प्रतीक हैं ।
चौकी पर स्थापित करें:
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भगवान विष्णु (या श्रीकृष्ण) की मूर्ति या तस्वीर
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माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर (विष्णु जी के बाईं ओर)
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भगवान गणेश की मूर्ति (प्रथम पूज्य)
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भगवान कुबेर की मूर्ति (यदि उपलब्ध हो)
💡 विशेष सुझाव: यदि आपने नई तिजोरी, गहने या कोई नई संपत्ति खरीदी है, तो उसे भी पूजा स्थल के पास रखें और उसका विशेष पूजन करें। इससे उस वस्तु में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा सामग्री (समग्री)
अक्षय तृतीया की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री एकत्रित करें :
| वस्तु | महत्व |
|---|---|
| पीले फूल (गेंदा, सरसों) | विष्णु-लक्ष्मी को अर्पित |
| चंदन | तिलक और भोग के लिए |
| अक्षत (चावल) | पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक |
| कमल गट्टे या मोती (यदि उपलब्ध) | विशेष शुभ माने गए |
| तुलसी दल | विष्णु जी को अत्यंत प्रिय |
| दूर्वा दल | गणेश जी को अर्पित |
| मिष्ठान (खीर, पेड़ा, या मखाने की खीर) | भोग के लिए |
| फल (नारियल, केला, आम) | नैवेद्य |
| पान, सुपारी, इलायची | तांबूल के रूप में |
| धूप, दीपक (घी या तेल का) | आरती के लिए |
| कलश (जल, आम के पत्ते, नारियल सहित) | दान और पूजा के लिए |
पूजा विधि (चरणबद्ध)
चरण 1: गणेश पूजन (प्रथम पूज्य)
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से होती है। गणेश जी को दूर्वा दल, लाल फूल और मोदक (या मिष्ठान) अर्पित करें। उनसे विघ्नों के नाश की प्रार्थना करें ।
चरण 2: कलश स्थापना (वैकल्पिक)
एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें, उसमें आम के पत्ते और नारियल (श्रीफल) रखें। कलश के मुंह पर लाल या पीला कपड़ा रखें। यह कलश ब्रह्मा, विष्णु, महेश का प्रतीक है – इसकी स्थापना से पूजा में दिव्य ऊर्जा का आह्वान होता है ।
चरण 3: श्रीलक्ष्मी-नारायण पूजन
अब मुख्य पूजा प्रारंभ करें:
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मूर्तियों को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
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चंदन, कुमकुम और अक्षत से तिलक लगाएं।
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पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
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धूप और दीपक जलाएं।
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फल, मिष्ठान और पान-सुपारी का भोग लगाएं।
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आरती करें और घंटी बजाएं ।
चरण 4: मंत्र जाप
पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें। विशेष रूप से ‘ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप अत्यंत फलदायी माना गया है ।
प्रमुख मंत्र:
| मंत्र | अर्थ / विशेषता |
|---|---|
| ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः | श्री लक्ष्मी-नारायण भगवान को नमस्कार |
| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः | माँ लक्ष्मी का मूल मंत्र |
| ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद | महालक्ष्मी मंत्र |
| ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा | कुबेर मंत्र (धन-समृद्धि के लिए) |
📿 सुझाव: यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम या श्री सूक्त का पाठ भी करें। मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन किया गया जाप अक्षय फल देता है ।
घटदान विधि (उदकुंभ दान)
पूजा के बाद घटदान या उदकुंभ दान का विशेष विधान है। इसमें जल से भरा कलश, फूल, अक्षत, चंदन और दक्षिणा सहित किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान किया जाता है ।
घटदान मंत्र:
एष धर्मघटो दत्तो ब्रह्माविष्णुशिवात्मकः।
अस्य प्रदानात्तृप्यन्तु पितरोऽपि पितामहाः॥गन्धोदकतिलैमिश्रं सान्नं कुम्भं साक्षिणाम्।
पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि अक्षय्यमूपतिष्ठतु॥
अर्थ: यह धर्मघट ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरूप है। इस दान से मेरे पितर और पितामह तृप्त हों। गंधयुक्त जल, तिल, अन्न और दक्षिणा सहित यह कलश मैं दान कर रहा हूँ – यह पितरों के लिए अक्षय हो ।
विशेष सुझाव (पूजा को और प्रभावशाली बनाने के लिए)
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उपवास का विकल्प: यदि आप पूर्ण उपवास नहीं कर सकते, तो फलाहार या एक समय भोजन करें ।
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तुलसी परिक्रमा: यदि आपके घर में तुलसी का पौधा है, तो उसकी 4 परिक्रमा करें – यह अत्यंत पुण्यदायी है ।
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गीता या रामायण पाठ: दिन के किसी भी समय एक अध्याय का पाठ करें।
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गौ सेवा: गाय को रोटी या चारा अवश्य खिलाएं ।
4. पौराणिक महत्व और कथाएँ
जब भी अक्षय तृतीया का नाम आता है, तो मन में यह जिज्ञासा जागती है कि आखिर इस तिथि में ऐसी कौन सी विशेषता है, जो इसे अन्य सभी पर्वों से अलग बनाती है? इसका उत्तर हमारे पौराणिक ग्रंथों और इतिहास के पन्नों में छिपा है। यह केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि कई चमत्कारिक घटनाओं की साक्षी रही है। आइए, जानते हैं इनसे जुड़ी रोचक कथाएँ।

त्रेता युग: भगवान परशुराम का प्राकट्य
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में छठा अवतार लिया था। उनका जन्म महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था।
इस दिन को परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने इसी तिथि पर क्षत्रियों के अत्याचारों से धरती को मुक्त कराने का संकल्प लिया था। इसलिए, अक्षय तृतीया का दिन शौर्य, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन परशुराम जी की विशेष पूजा करने से शत्रुओं से मुक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
द्वापर युग: श्रीकृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता
द्वापर युग की सबसे मार्मिक और प्रेरणादायक कथा भगवान श्रीकृष्ण और उनके सखा सुदामा की है। यह घटना भी अक्षय तृतीया से ही जुड़ी है।
कहानी कुछ यूँ है – सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे। उनके घर भूखों सोना तक मुश्किल हो गया। उनकी पत्नी ने उन्हें अपने बालपन के मित्र श्रीकृष्ण के पास द्वारिका भेजा। सुदामा के पास कोई भेंट नहीं थी, उन्होंने बस मुट्ठी भर चिवड़ा (पोहा) ले लिया।
जब वह भगवान कृष्ण के पास पहुंचे, तो कृष्ण ने उन्हें इतने प्रेम से लिपटाया कि सुदामा सारी दरिद्रता भूल गए। कृष्ण ने वह चिवड़ा बड़े चाव से खाया और बदले में सुदामा को अक्षय समृद्धि का आशीर्वाद दिया। जब सुदामा वापस लौटे, तो उनकी झोपड़ी के स्थान पर एक भव्य महल था। यह कथा सिखाती है कि निष्कपट प्रेम और सच्ची भक्ति के आगे सारी दरिद्रता हार जाती है।
पांडव और अक्षय पात्र: अटूट भोजन का चमत्कार
महाभारत काल की एक और प्रसिद्ध कथा है अक्षय पात्र की। जब पांडवों को वनवास के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, तो उनके पास एक दिन अचानक दुर्वासा ऋषि और उनके हजारों शिष्य आ गए। उन्होंने भोजन की मांग की।
पांडव घबरा गए क्योंकि उनके पास सिर्फ थोड़ा सा ही भोजन बचा था। तब भगवान सूर्य की कृपा से उन्हें अक्षय पात्र (अटूट बर्तन) मिला। इस बर्तन में जब तक द्रौपदी स्वयं भोजन न कर लें, तब तक पूरी दुनिया के लिए भोजन बनता रहता था।
यह चमत्कार भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था। यह कथा सिखाती है कि विपत्ति के समय में भी यदि धर्म और विश्वास साथ हो, तो प्रकृति और देवता स्वयं सहायता के लिए आ जाते हैं।
गंगा अवतरण: पापों का नाश करने आई मां गंगा
अक्षय तृतीया का एक अत्यंत पवित्र संबंध मां गंगा के धरती पर अवतरण से भी है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी तिथि पर स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं।
इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी या गंगा दशहरा से पहले एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। गंगा स्नान और गंगा दान का इस दिन विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कुबेर पूजा: धन के देवता का आशीर्वाद
अंतिम लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण है धन के देवता कुबेर से जुड़ी मान्यता। अक्षय तृतीया के दिन कुबेर की विशेष रूप से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इसी दिन कुबेर को धन का स्वामी बनने का वरदान मिला था।
यदि इस दिन भगवान कुबेर के साथ माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाए, तो घर में कभी धन की कमी नहीं रहती। व्यापारी और कारोबारी लोग इस दिन नई बही-खाता और तिजोरी की पूजा करते हैं।
सारांश: एक तिथि, अनेक चमत्कार
तो यह है अक्षय तृतीया का पौराणिक वैभव। एक ही तिथि पर –
- भगवान परशुराम ने जन्म लिया।
- श्रीकृष्ण-सुदामा की सखाई अमर हुई।
- पांडवों को अक्षय पात्र मिला।
- मां गंगा धरती पर उतरीं।
- कुबेर को धनाधिपत्य मिला।
यही कारण है कि इस दिन को सिर्फ ‘शुभ’ नहीं, बल्कि ‘सर्वश्रेष्ठ’ माना जाता है। यह तिथि हमें सिखाती है कि जब धर्म, भक्ति और सत्कर्म का संगम होता है, तो ब्रह्मांड की शक्तियाँ स्वयं आपकी सहायता के लिए आगे आती हैं।
5. धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ यानी ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है। पंचांगों में चार ऐसे मुहूर्त बताए गए हैं – देवउठनी एकादशी, वसंत पंचमी, गुड़ी पड़वा और अक्षय तृतीया। आइए, जानते हैं कि आखिर इस तिथि को इतना विशेष क्या बनाता है और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन किन अद्भुत संयोगों का निर्माण होता है।

सूर्य और चंद्रमा का दुर्लभ संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्यदेव और चंद्रदेव दोनों ही अपनी उच्च राशियों में विराजमान होते हैं। यह स्थिति अत्यंत दुर्लभ और शुभ मानी जाती है।
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सूर्यदेव – इस दिन मेष राशि में होते हैं। मेष राशि सूर्य के लिए उच्च का स्थान है, जिससे सूर्य की ऊर्जा और तेज अपने चरम पर होती है।
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चंद्रदेव – इस दिन वृषभ राशि में होते हैं। वृषभ चंद्रमा की उच्च राशि है, जो चंद्रमा को अत्यंत शक्तिशाली और स्थिर बनाती है।
ज्योतिष में सूर्य आत्मा का कारक माना जाता है और चंद्रमा मन का। जब ये दोनों एक साथ अपनी पूर्ण शक्ति में होते हैं, तो व्यक्ति के आत्मबल और मानसिक संतुलन दोनों ही चरम पर होते हैं। यही कारण है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य असाधारण फल देते हैं।
रोहिणी नक्षत्र का अमृत योग
अक्षय तृतीया की एक और ज्योतिषीय विशेषता है – रोहिणी नक्षत्र का इस तिथि पर आना। रोहिणी नक्षत्र को नक्षत्रों की रानी कहा जाता है और इसके स्वामी चंद्रदेव हैं। जब तृतीया तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बनता है, तो इसे ‘सर्वार्थ सिद्ध योग’ या ‘अमृत सिद्ध योग’ कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा वृषभ राशि में होता है – जो उनकी उच्च राशि है। इससे धन, वनस्पति, समृद्धि और मन की स्थिरता का विशेष प्रभाव बनता है। मान्यता है कि रोहिणी नक्षत्र में अक्षय तृतीया आने से देश और विश्व के लिए आने वाला समय सुखदायक होता है और विपत्तियों का प्रभाव कम होता है।
बिना मुहूर्त का शुभ दिन – क्यों?
ज्योतिष शास्त्र में आमतौर पर किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले मुहूर्त देखने का विधान है। लेकिन अक्षय तृतीया एक ऐसा दिन है, जिसे ‘निर्मल मुहूर्त’ और ‘सदाबहार मुहूर्त’ का दर्जा दिया गया है।
ऐसा क्यों है? इसके पीछे ज्योतिषीय तर्क बहुत स्पष्ट है:
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इस दिन कोई भी दोष (मालफिक योग) नहीं होता।
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सूर्य और चंद्रमा के उच्च होने से तिथि निर्दोष हो जाती है।
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यह युगादि तिथि है – जिस दिन सतयुग समाप्त हुआ और त्रेतायुग आरंभ हुआ।
वराहमिहिर के बृहत्संहिता और मुहूर्त चिंतामणि जैसे ग्रंथों में भी अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। इसका सीधा अर्थ है – इस दिन पंडित से मुहूर्त पूछने की आवश्यकता नहीं है। पूरा दिन ही शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम है।
पुराणों में उल्लेख (वैदिक संदर्भ)
स्कन्द पुराण और नारद पुराण में अक्षय तृतीया के ज्योतिषीय महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार:
“वैशाख शुक्ल तृतीया युगादि तिथिरुच्यते। सूर्याचन्द्रमसोः तस्मिन्नुच्चस्थाने व्यवस्थितिः।।”
अर्थात – वैशाख शुक्ल की तृतीया युगादि तिथि कहलाती है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा अपने उच्च स्थानों पर स्थित होते हैं।
ब्रह्म पुराण के अनुसार, इस दिन रोहिणी नक्षत्र का होना अत्यंत शुभ माना गया है। इसे ‘कामदा तिथि’ भी कहा गया है – जो सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली होती है।
विशेष सावधानी (ज्योतिषीय दृष्टि से)
हालाँकि यह दिन स्वयं सिद्ध है, फिर भी कुछ ज्योतिषीय सूक्ष्मताओं का ध्यान रखना उचित होता है। आचार्यों के अनुसार:
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इस दिन केवल शुभ कर्म (पूजा, दान, जप, तप) ही करने चाहिए।
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विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद जैसे लौकिक कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त का चयन करना अधिक उत्तम माना गया है।
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सूर्योदय के बाद का समय सर्वाधिक शुभ होता है।
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कुछ विशेष जन्म नक्षत्रों (जैसे पूर्वाभाद्रपद, विशाखा, पुनर्वसु) वाले लोगों के लिए रोहिणी नक्षत्र ‘निधन तारा’ बनता है – ऐसे में विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है।
6. क्या करें और क्या न करें? (अक्षय तृतीया के सात्विक नियम)
अक्षय तृतीया केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सत्कर्म और धार्मिक आचरण का दिन है। जिस प्रकार एक बीज को अंकुरित होने के लिए सही मिट्टी, पानी और धूप की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार इस दिन किए गए शुभ कार्यों को अक्षय (अटूट) फल देने के लिए कुछ आवश्यक नियमों का पालन करना चाहिए।
शास्त्रों में इस दिन के लिए स्पष्ट रूप से बताया गया है कि क्या करना चाहिए और किससे बचना चाहिए। आइए, विस्तार से जानते हैं।

✅ करने योग्य कार्य (विधेय कर्म)
भविष्य पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन निम्नलिखित कार्य अत्यंत शुभ और फलदायी माने गए हैं। इन्हें करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
1. प्रातः स्नान और संध्या वंदन
क्यों करें?
स्कन्द पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00-5:00 बजे) में उठकर स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी है। यदि संभव हो तो गंगा स्नान करें, नहीं तो घर के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
कैसे करें?
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स्नान से पहले संकल्प लें कि आज मैं विधि-विधान से सभी शुभ कर्म करूंगा।
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स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें।
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संध्या वंदन और गायत्री मंत्र का जाप अवश्य करें।
📜 शास्त्रीय वचन: “वैशाख शुक्ल तृतीयायां प्रातः स्नानं नरः कुर्यात्। सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति॥”
(जो व्यक्ति वैशाख शुक्ल तृतीया पर प्रातः स्नान करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक को प्राप्त करता है।)
2. पूजा (विशेषकर लक्ष्मी-नारायण की)
क्यों करें?
मत्स्य पुराण के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय सुख, धन-धान्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
कैसे करें?
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श्रीलक्ष्मी-नारायण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
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पीले फूल, चंदन, तुलसी दल और मिष्ठान अर्पित करें।
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घी का दीपक जलाएं।
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विष्णु सहस्रनाम या श्री सूक्त का पाठ करें।
3. जप (मंत्रों का उच्चारण)
क्यों करें?
नारद पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया पर किए गए जप का फल सामान्य दिनों की तुलना में हजारों गुना अधिक होता है। यह मन की शुद्धि और आत्मबल बढ़ाने का सबसे सरल उपाय है।
किन मंत्रों का जप करें?
| मंत्र | संख्या | लाभ |
|---|---|---|
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | 108 बार | मोक्ष और शांति |
| ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्धलक्ष्म्यै नमः | 108 बार | धन-समृद्धि |
| ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः | 108 बार | वैवाहिक सुख |
| गायत्री मंत्र | 11 या 21 बार | बुद्धि और आत्मबल |
4. दान (सबसे महत्वपूर्ण कर्म)
क्यों करें?
भविष्य पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि अक्षय तृतीया पर किया गया दान अक्षय फल देता है – यानी उसका फल कभी समाप्त नहीं होता। यह पितरों को तृप्त करने और जीवन में समृद्धि लाने का सर्वोत्तम माध्यम है।
क्या दान करें?
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अन्नदान – भूखों को भोजन कराएं। यह सबसे बड़ा दान माना गया है।
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वस्त्रदान – गरीबों को नए कपड़े दान करें।
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जलदान – प्यासों को जल पिलाएं या सार्वजनिक जल व्यवस्था में सहयोग करें।
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छाता और जूते – यात्रियों को धूप-बारिश से बचाने वाली वस्तुएं दान करें।
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फलदान – विशेषकर नारियल और आम का दान शुभ माना गया है।
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दक्षिणा – योग्य ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को धन दान करें।
💡 विशेष: यदि आप सोना या चांदी खरीद रहे हैं, तो उसका कुछ अंश दान करने का संकल्प लें। इससे आपकी संपत्ति में वृद्धि होती है।
5. तीर्थ यात्रा
क्यों करें?
स्कन्द पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन किसी पवित्र तीर्थ (गंगा, यमुना, प्रयाग, काशी, रामेश्वरम आदि) की यात्रा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
क्या न हो तो?
यदि तीर्थ यात्रा संभव न हो, तो घर में ही किसी पवित्र नदी का स्मरण करें और उसके जल से स्नान करें। मानसिक तीर्थयात्रा भी शास्त्रों में मान्य है।
6. नए काम की शुरुआत
क्यों करें?
अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है – यानी इस दिन बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।
कौन से नए काम शुरू करें?
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गृह प्रवेश – नए घर में प्रवेश करें।
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नया व्यापार या नौकरी शुरू करें।
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सगाई या विवाह का शुभ संकल्प लें।
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वाहन (कार, बाइक) खरीदें।
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गहने (सोना, चांदी, हीरा) खरीदें।
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निवेश (शेयर, म्यूचुअल फंड, एफडी) शुरू करें।
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घर के नवीनीकरण या निर्माण का शुभारंभ करें।
🎯 ज्योतिषीय सुझाव: नए कार्य के लिए अभिजीत मुहूर्त (लगभग 11:45 AM से 12:25 PM) सबसे उत्तम माना गया है।
7. तुलसी पूजन और परिक्रमा
क्यों करें?
तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। पद्म पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया पर तुलसी की परिक्रमा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
कैसे करें?
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तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें।
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उसके चारों ओर चार परिक्रमा करें।
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तुलसी मंत्र का जाप करें – “ॐ तुलसी श्री सत्यवत्यै नमः”
8. गौ सेवा
क्यों करें?
गाय को हिंदू धर्म में ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है। भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन गाय को हरा चारा, रोटी या गुड़ खिलाने से सभी पाप नष्ट होते हैं और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
क्या करें?
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सुबह के समय गाय को जौ या गेहूं की रोटी खिलाएं।
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गाय के शरीर पर चंदन का तिलक लगाएं।
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गाय को प्रणाम करें और उसके स्वास्थ्य की कामना करें।
❌ न करने योग्य कार्य (निषेध कर्म)
जिस प्रकार शुभ कर्म करना आवश्यक है, उसी प्रकार कुछ निषिद्ध कर्मों से बचना भी उतना ही जरूरी है। मत्स्य पुराण और स्कन्द पुराण में इन बातों का विशेष उल्लेख मिलता है।
1. झूठ न बोलें (सत्य का पालन करें)
क्यों न करें?
मनु स्मृति के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन झूठ बोलना सबसे गंभीर पापों में से एक है। इस दिन सत्य का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सत्य की स्थापना होती है और उसकी वाणी शक्तिशाली बनती है।
क्या करें?
-
यदि कुछ बोलना है तो सच बोलें।
-
यदि सच बोलना हानिकारक हो, तो मौन रहना उत्तम है।
-
इस दिन गप्पें और व्यर्थ की बातें न करें।
📜 शास्त्रीय वचन: “सत्येन विष्णुस्तुष्यति, सत्येन वरदो भवेत्। अक्षयायां तृतीयायां सत्यं वाच्यं विशेषतः॥”
(सत्य से विष्णु प्रसन्न होते हैं, सत्य से वरदान मिलता है। अक्षय तृतीया पर विशेष रूप से सत्य बोलना चाहिए।)
2. क्रोध न करें (मन को शांत रखें)
क्यों न करें?
स्कन्द पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया पर क्रोध करने से उस दिन किए गए सभी शुभ कर्म नष्ट हो जाते हैं। क्रोध तामसिक गुण है, जो सात्विक दिन पर कोई स्थान नहीं रखता।
क्या करें?
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मन को शांत रखने का प्रयास करें।
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यदि क्रोध आए तो मौन हो जाएं या कमरे से बाहर निकल जाएं।
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भगवान का स्मरण करें और गहरी सांस लें।
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किसी से बहस या तकरार न करें।
3. बिना कारण पैसे लौटाना या मांगना
क्यों न करें?
ज्योतिष शास्त्र और धर्मशास्त्रों के अनुसार, अक्षय तृतीया धन प्रवाह का दिन है। इस दिन बिना कारण पैसे लौटाने (जब कर्ज लौटाने का समय न हो) या पैसे मांगने से धन की देवी नाराज हो जाती हैं और आर्थिक अवरोध उत्पन्न होते हैं।
क्या करें?
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यदि आप पर कोई कर्ज है, तो उसे दूसरे दिन लौटाएं (जब तक कि लौटाने का समय न आ गया हो)।
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किसी से उधार या दान न मांगें।
-
यदि कोई आपसे पैसे मांगे, तो उसे दान समझकर श्रद्धापूर्वक दें – लेकिन बिना किसी शर्त के।
💡 टिप: यदि आपने कोई चीज़ बेची है, तो उसके पैसे इस दिन न लें – अगले दिन लेना शुभ माना जाता है। वरिष्ठों का कहना है कि इस दिन पैसा ग्रहण नहीं करना चाहिए, केवल देना चाहिए।
4. तामसिक भोजन और मदिरा से बचें
क्यों न करें?
भविष्य पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज़ और तामसिक भोजन का सेवन करने से उस दिन किए गए सभी शुभ कर्म निष्फल हो जाते हैं।
क्या करें?
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सात्विक भोजन करें – फल, दूध, खीर, पूरी-हलवा, आदि।
-
यदि संभव हो तो उपवास रखें या फलाहार करें।
-
दिनभर सादा, सुपाच्य और सात्विक भोजन लें।
5. बाल-नाखून न काटें
क्यों न करें?
धर्मशास्त्रों के अनुसार, अत्यंत शुभ दिनों पर बाल और नाखून काटना अशुभ माना जाता है। यह सौंदर्य और ऊर्जा का ह्रास करता है। अक्षय तृतीया पर यह कार्य करने से लक्ष्मी अप्रसन्न होती हैं।
क्या करें?
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यह कार्य एक दिन पहले या एक दिन बाद करें।
-
इस दिन अपने शरीर की सफाई तो करें, लेकिन बाल-नाखून काटने से बचें।
6. गंदे या फटे कपड़े न पहनें
क्यों न करें?
स्कन्द पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया पर गंदे, मैले या फटे कपड़े पहनने से दरिद्रता आती है। इस दिन शरीर और वस्त्र दोनों की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।
क्या करें?
-
नए या धुले हुए साफ कपड़े पहनें।
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पीले रंग के वस्त्र सबसे उत्तम माने गए हैं।
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महिलाएं पीली साड़ी या सूट पहन सकती हैं, पुरुष पीला कुर्ता या शर्ट।
7. निंदा और गपशप से बचें
क्यों न करें?
नारद पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया पर किसी की निंदा करना या व्यर्थ की गपशप करना उस दिन के पुण्य को शून्य कर देता है। इस दिन मौन साधना या सद्विचार ही श्रेष्ठ है।
क्या करें?
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किसी के बारे में बुरा न बोलें।
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राजनीति, गप्पें और फालतू बातें न करें।
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यदि संभव हो तो कुछ समय मौन बैठें और ईश्वर का चिंतन करें।
8. अपने घर को गंदा न रखें
क्यों न करें?
श्री सूक्त के अनुसार, माता लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। गंदे घर में लक्ष्मी का वास नहीं होता। अक्षय तृतीया पर यदि घर गंदा हो, तो दान-पूजा के बावजूद लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं।
क्या करें?
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पूजा से पहले घर की साफ-सफाई कर लें।
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मंदिर की सफाई विशेष रूप से करें।
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घर के दरवाजे पर आम के पत्ते या गेंदे के फूलों की माला लगाएं।
एक नज़र में: क्या करें और क्या न करें (सारणी)
| ✅ करें (विधेय) | ❌ न करें (निषेध) |
|---|---|
| प्रातः स्नान (गंगाजल से) | झूठ बोलना |
| लक्ष्मी-नारायण पूजा | क्रोध करना |
| मंत्र जाप (108 बार) | बिना कारण पैसे लौटाना/मांगना |
| दान (अन्न, वस्त्र, जल, धन) | तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) |
| तीर्थ यात्रा | बाल-नाखून काटना |
| नए काम की शुरुआत | गंदे/फटे कपड़े पहनना |
| तुलसी परिक्रमा | निंदा और गपशप करना |
| गौ सेवा | घर को गंदा रखना |
| सत्य बोलना | किसी को धोखा देना |
| मन को शांत रखना | ईर्ष्या और द्वेष करना |
नियमों का पालन क्यों जरूरी है? (शास्त्रीय दृष्टि)
मत्स्य पुराण (अध्याय 65) में कहा गया है:
“ये केचित्कुर्वते कर्म नियमेन शुभाशुभम्। तस्य सर्वस्य वै फलं अक्षयायां भवेद्ध्रुवम्॥”
अर्थ: जो भी व्यक्ति इस दिन नियमपूर्वक शुभ या अशुभ कर्म करता है – उसका फल निश्चित रूप से अक्षय (कभी न समाप्त होने वाला) हो जाता है। इसलिए इस दिन अशुभ कर्मों से बचना उतना ही जरूरी है, जितना शुभ कर्मों को अपनाना।
7. अक्षय तृतीया का आधुनिक महत्व (बाजार और लोग)
अक्षय तृतीया आज के दौर में सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं रह गया है – यह भारत के अर्थतंत्र, बाजार और आम जनजीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। जहाँ एक ओर यह दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए समर्पित है, वहीं दूसरी ओर यह सोने-चांदी की खरीदारी, नए निवेश और व्यापारिक शुरुआत का सबसे बड़ा अवसर भी है।
आइए, जानते हैं कि किस प्रकार यह प्राचीन पर्व आधुनिक युग में भी अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है और कैसे बाजार एवं लोग इसे अपने-अपने ढंग से मना रहे हैं।

सोने-चांदी की खरीदारी: परंपरा और निवेश का संगम
मान्यता: पुराणों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन खरीदा गया सोना कभी कम नहीं होता – यह अक्षय (अटूट) रहता है। यही कारण है कि इस दिन स्वर्ण खरीद को अत्यंत शुभ माना जाता है ।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य: आज के समय में यह मान्यता एक मजबूत निवेश रणनीति में बदल चुकी है। पिछले पाँच वर्षों में सोने ने एक अक्षय तृतीया से दूसरी तक औसतन 30% सालाना रिटर्न दिया है । इस वर्ष (2026) की बात करें तो:
-
सोने की कीमतें: पिछले एक वर्ष में सोने की कीमतों में लगभग 60% की वृद्धि हुई है। हालाँकि, जनवरी 2026 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से अब कीमतों में लगभग 16% की गिरावट आई है, जो इसे खरीदारी के लिए एक आकर्षक अवसर बनाती है ।
-
बदलती आदतें: महंगाई और बढ़ती कीमतों के कारण लोग अब हल्के वजन के गहने (लाइटवेट ज्वेलरी), स्टडेड ज्वेलरी (कान के बालियां, अंगूठियां) और सोने के सिक्कों को प्राथमिकता दे रहे हैं ।
-
सोने के विकल्प: अब केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी, लैब-ग्रोन डायमंड और डिज़ाइनर ज्वेलरी भी लोगों की पहली पसंद बन रही है । विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश पोर्टफोलियो में 8-15% सोना और 20-25% चांदी रखना एक संतुलित रणनीति है ।
📊 आंकड़े बताते हैं: कोटक सिक्योरिटीज के अनुसार, भारत में गोल्ड ईटीएफ (Exchange Traded Funds) में निवेश 2020 के ~$1.9 बिलियन से बढ़कर मार्च 2026 तक लगभग $20 बिलियन हो गया है। यह दर्शाता है कि युवा पीढ़ी अब डिजिटल गोल्ड और ईटीएफ को भी उतना ही अपना रही है जितना कि भौतिक सोने को ।
नए निवेश और बिजनेस: शुभारंभ का पर्व
मान्यता: अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है – यानी इस दिन बिना मुहूर्त देखे कोई भी नया कार्य शुरू करना शुभ माना जाता है ।
आधुनिक परिप्रेक्ष्य: यह पर्व अब केवल व्यक्तिगत खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार जगत के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
-
गृह प्रवेश और वाहन खरीद: इस दिन नए घर में प्रवेश करना या नई कार/बाइक खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्वेलरी के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी इस दिन खूब बिक्री होती है।
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नया व्यापार और निवेश: कई उद्यमी और व्यापारी इस दिन अपने नए बिजनेस, शोरूम या निवेश की शुरुआत करते हैं। यह दिन स्टॉक मार्केट और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी शुभ माना जाता है।
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विवाह और सगाई: अक्षय तृतीया शादियों और सगाई के लिए भी एक लोकप्रिय तिथि है। इस दिन विवाह बंधन में बंधने वाले जोड़ों के जीवन में कभी सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती, ऐसी मान्यता है ।
💡 ज्योतिषीय सलाह: इस वर्ष 19 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया है। तृतीया तिथि प्रातः 10:49 AM से प्रारंभ होकर 20 अप्रैल सुबह 7:27 AM तक रहेगी । सोने की खरीदारी के लिए सुबह 10:49 AM से दोपहर 12:20 PM के बीच का समय (स्थान के अनुसार भिन्न) सर्वाधिक शुभ माना गया है ।
डिजिटल गोल्ड का बढ़ता चलन:
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छोटी रकम से शुरुआत: ₹500 से भी कम में सोना खरीदा जा सकता है।
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शुद्धता की गारंटी: BIS हॉलमार्क और 24 कैरेट शुद्धता की गारंटी।
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लिक्विडिटी: कभी भी बेचकर पैसे निकाले जा सकते हैं।
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फिजिकल डिलीवरी: चाहें तो सिक्के या बार के रूप में डिलीवरी ले सकते हैं ।
निवेश के नए आयाम: सिर्फ सोना ही नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, इस अक्षय तृतीया पर निवेशकों को सोने के साथ-साथ चांदी पर भी ध्यान देना चाहिए। चांदी एक औद्योगिक धातु भी है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी से उछाल आ सकता है ।
केयनट चेनवाला (कोटक सिक्योरिटीज़) के अनुसार:
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गोल्ड: पोर्टफोलियो का 8-15% सोने में रखें।
-
सिल्वर: पोर्टफोलियो का 20-25% चांदी में रखें, लेकिन कम से कम 2 वर्ष की अवधि के लिए ।
ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन: कहां करें खरीदारी?
| पहलू | ऑनलाइन (डिजिटल गोल्ड) | ऑफलाइन (ज्वैलरी स्टोर) |
|---|---|---|
| सुविधा | घर बैठे, कभी भी खरीद सकते हैं | स्टोर जाना पड़ता है |
| न्यूनतम राशि | ₹500 से शुरू | सिक्के के लिए ₹5,000+ |
| शुद्धता | 24 कैरेट, BIS हॉलमार्क | 22/24 कैरेट, BIS हॉलमार्क |
| मेकिंग चार्ज | कोई मेकिंग चार्ज नहीं | 8-25% तक मेकिंग चार्ज |
| तत्काल डिलीवरी | फिजिकल डिलीवरी में 2-3 दिन लगते हैं | तुरंत मिल जाता है |
| भावनात्मक मूल्य | कम | अधिक (परंपरा, शगुन) |
सुझाव: यदि निवेश के लिए खरीद रहे हैं तो डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ बेहतर विकल्प है। यदि पहनने या परंपरा के लिए खरीद रहे हैं तो भौतिक ज्वेलरी ही सही रहेगी ।
खरीदारी से पहले ध्यान रखें ये 5 बातें
ऑफर्स के चक्कर में जल्दबाजी न करें। इन बातों का ध्यान रखें:
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BIS हॉलमार्क जरूर देखें – बिना हॉलमार्क का सोना न खरीदें। हॉलमार्किंग शुद्धता की गारंटी है ।
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मेकिंग चार्ज की तुलना करें – अलग-अलग ब्रांड्स के मेकिंग चार्ज में भारी अंतर हो सकता है ।
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गोल्ड रेट लॉक का फायदा उठाएं – अगर कीमतें बढ़ने की संभावना है, तो एडवांस बुकिंग कर लें ।
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निवेश के लिए सिक्का या बार बेहतर – गहनों में मेकिंग चार्ज जुड़ जाता है, जो निवेश पर भारी पड़ सकता है ।
-
बजट तय करके चलें – ऑफर्स देखकर जरूरत से ज्यादा खर्च न करें ।
8. समग्र निष्कर्ष (मुख्य सार)
अक्षय तृतीया केवल सोने-चांदी की खरीदारी या धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं है – यह जीवन जीने की पूरी कला सिखाने वाला पर्व है। स्कन्द पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन का मूल उद्देश्य आत्म-शुद्धि, दान और सत्कर्म है।

जहाँ एक ओर ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य और चंद्रमा का अपनी उच्च राशियों में होना इस दिन को अबूझ मुहूर्त का दर्जा देता है, वहीं दूसरी ओर पौराणिक कथाएँ – परशुराम जन्म, श्रीकृष्ण-सुदामा मैत्री, पांडवों का अक्षय पात्र और गंगा अवतरण – इसकी दिव्यता को प्रमाणित करती हैं।
आधुनिक संदर्भ में यह दिन व्यापार, निवेश और नए कार्यों के शुभारंभ का प्रतीक बन गया है, लेकिन इसके गहन अर्थ को नहीं भूलना चाहिए। सच्ची अक्षयता भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि अच्छे कर्मों, सत्य वचनों, निष्कपट दान और क्रोध पर नियंत्रण में है। इस दिन की गई एक छोटी-सी अच्छाई भी अनंत फल देती है।
अतः हम सबको चाहिए कि इस पर्व को केवल बाजारवाद की दृष्टि से न देखें, बल्कि इसे सात्विकता, उदारता और आत्म-संयम का संकल्प दिवस बनाएँ। अक्षय तृतीया की सच्ची शुभकामना यही है कि आपका जीवन अटूट सुख, अमिट शांति और अक्षय समृद्धि से परिपूर्ण हो। ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः
9. अक्षय तृतीया: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. अक्षय तृतीया कब मनाई जाती है?
उत्तर: यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2026 में यह 19 अप्रैल को है।
2. अक्षय तृतीया को ‘अक्षय’ क्यों कहते हैं?
उत्तर: ‘अक्षय’ का अर्थ है “जो कभी नष्ट न हो”। इस दिन किया गया दान, जप और पुण्य अटूट फल देता है।
3. क्या अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त काम कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा जाता है। इस दिन बिना पंडित से मुहूर्त पूछे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं।
4. अक्षय तृतीया पर कौन सी पूजा करनी चाहिए?
उत्तर: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा मुख्य रूप से करें। भगवान कुबेर और भगवान गणेश की भी पूजा करें।
5. अक्षय तृतीया पर कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
उत्तर: “ॐ श्री लक्ष्मीनारायणाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। यह धन और समृद्धि देने वाला मंत्र है।
6. अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्यों शुभ है?
उत्तर: मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना कभी कम नहीं होता और यह पीढ़ियों तक चलता है। यह धन की देवी का आशीर्वाद माना जाता है।
7. अक्षय तृतीया पर कौन सा दान सबसे अच्छा है?
उत्तर: अन्नदान (भोजन) सबसे उत्तम दान है। इसके अलावा जल, वस्त्र, छाता, जूते और धन का दान भी शुभ है।
8. क्या अक्षय तृतीया पर शादी कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह दिन विवाह और सगाई के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे ‘अबूझ मुहूर्त’ का दर्जा प्राप्त है।
9. अक्षय तृतीया पर क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर: झूठ न बोलें, क्रोध न करें, बिना कारण पैसे लौटाएं या मांगें नहीं, और तामसिक भोजन से बचें।
10. अक्षय तृतीया का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
उत्तर: इस दिन सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में होते हैं – दोनों अपनी उच्च राशियों में। रोहिणी नक्षत्र का भी शुभ संयोग बनता है।
11. अक्षय तृतीया और आखा तीज में क्या अंतर है?
उत्तर: कोई अंतर नहीं है। ‘आखा तीज’ ही अक्षय तृतीया का स्थानीय और सरल नाम है, विशेषकर उत्तर भारत में।
12. क्या अक्षय तृतीया पर उपवास रखना चाहिए?
उत्तर: यह वैकल्पिक है। यदि पूर्ण उपवास न कर सकें तो फलाहार या एक समय भोजन करना भी शुभ माना जाता है।
13. अक्षय तृतीया पर गंगा स्नान का क्या महत्व है?
उत्तर: भविष्य पुराण के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
14. क्या अक्षय तृतीया पर नया व्यवसाय शुरू कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह दिन नए बिजनेस, निवेश, गृह प्रवेश और वाहन खरीद के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
15. अक्षय तृतीया पर किन देवताओं की पूजा होती है?
उत्तर: मुख्य रूप से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान परशुराम की पूजा होती है।
16. परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया का क्या संबंध है?
उत्तर: भगवान परशुराम का जन्म त्रेता युग में इसी अक्षय तृतीया के दिन हुआ था। इसलिए यह परशुराम जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।
17. क्या अक्षय तृतीया पर सिर्फ सोना ही खरीदना चाहिए?
उत्तर: नहीं, चांदी, तांबा, पीतल, हीरा और अन्य कीमती धातुएँ भी खरीद सकते हैं। यहाँ तक कि नए बर्तन खरीदना भी शुभ है।
18. अक्षय तृतीया पर तुलसी पूजन क्यों करते हैं?
उत्तर: तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन तुलसी की परिक्रमा करने से सारे कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है।
19. क्या अक्षय तृतीया पर नाखून काट सकते हैं?
उत्तर: नहीं, धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन बाल और नाखून काटना अशुभ माना गया है। यह काम एक दिन पहले या बाद में करें।
20. अक्षय तृतीया पर कितनी बार दान करना चाहिए?
उत्तर: कम से कम एक बार अवश्य दान करें। जितना अधिक दान करेंगे, उतना ही अधिक पुण्य अक्षय होगा। अपनी शक्ति के अनुसार करें।
21. क्या डिजिटल गोल्ड खरीदना भी अक्षय तृतीया पर शुभ है?
उत्तर: हाँ, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी उतना ही शुभ माना जाता है। भावना और संकल्प मायने रखता है, माध्यम नहीं।
22. अक्षय तृतीया की कथा क्या है?
उत्तर: इस दिन से जुड़ी कई कथाएँ हैं – परशुराम जन्म, श्रीकृष्ण-सुदामा मैत्री, पांडवों का अक्षय पात्र, और माता गंगा का धरती पर अवतरण।
23. क्या अक्षय तृतीया पर मांस-मदिरा ले सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। इस दिन तामसिक भोजन वर्जित है। केवल सात्विक भोजन (फल, दूध, खीर, पूरी-हलवा) ही लें।
24. अक्षय तृतीया का सबसे अच्छा मुहूर्त क्या है?
उत्तर: 2026 में तृतीया तिथि 19 अप्रैल सुबह 10:49 AM से प्रारंभ होगी। खरीदारी के लिए सुबह 10:49 AM से दोपहर 12:20 PM का समय सर्वश्रेष्ठ है।
25. अक्षय तृतीया पर गाय को क्या खिलाना चाहिए?
उत्तर: गाय को हरा चारा, गेहूं या जौ की रोटी, गुड़ या चना खिलाएं। गौसेवा से सभी पाप नष्ट होते हैं और पुण्य मिलता है।
26. क्या अक्षय तृतीया पर पैसे उधार दे सकते हैं?
उत्तर: देना शुभ है, लेकिन लौटाना इस दिन न करें। यदि किसी से पैसे मांगे या लौटाएँ तो धन की देवी अप्रसन्न हो सकती हैं।
27. अक्षय तृतीया के बाद अगला शुभ दिन कौन सा है?
उत्तर: अक्षय तृतीया के बाद वट सावित्री व्रत (ज्येष्ठ अमावस्या) और गंगा दशहरा (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) अगले प्रमुख शुभ दिन हैं।
28. क्या महिलाएं अक्षय तृतीया का व्रत रख सकती हैं?
उत्तर: हाँ, महिलाएं विशेष रूप से सुहाग और संतान सुख की कामना से यह व्रत रखती हैं। पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं।
29. अक्षय तृतीया पर किस रंग के कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर: पीले रंग के कपड़े पहनना सबसे शुभ माना गया है। पीला रंग श्रीविष्णु और माता लक्ष्मी को प्रिय है और यह समृद्धि का प्रतीक है।
30. अक्षय तृतीया का संदेश क्या है?
उत्तर: सच्ची अक्षयता सोने-चांदी में नहीं, अच्छे कर्मों में है। सत्य बोलो, दान करो, क्रोध मत करो – यही इस पर्व का सार है।
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