श्री भैरव देव जी आरती – Aart Shri Bhairav Ji – जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा
श्री भैरव देव आरती का – सार (भावार्थ) श्री भैरव देव जी आरती शक्ति, संरक्षण, करुणा और भय-नाश के भाव …
श्री भैरव देव आरती का – सार (भावार्थ) श्री भैरव देव जी आरती शक्ति, संरक्षण, करुणा और भय-नाश के भाव …
श्री भैरव आरती का – सार (भावार्थ) श्री भैरव देव जी आरती भक्ति, शरणागति, निर्भयता और करुणा से परिपूर्ण है। …
भगवान कैलासवासी आरती का सार (भावार्थ) भगवान कैलासवासी आरती महादेव शिव के दिव्य कैलास-स्वरूप, उनकी लीलाओं, करुणा और सर्वशक्तिमत्ता को …
भगवान गंगाधर आरती का सार (भावार्थ) भगवान गंगाधर आरती शिव की महिमा, करुणा, सौंदर्य, लीला और भक्तवत्सलता को अत्यंत काव्यात्मक …
जयति जयति जग-निवास आरती – सार (भावार्थ) “जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी” आरती भगवान शिव (शंकर) के सर्वव्यापक, करुणामय और …
हर हर महादेव आरती – सत्य, सनातन, सुंदर – सार (भावार्थ) “हर हर महादेव आरती” भगवान महादेव के सर्वव्यापक, अनंत, …
ॐ जय शिव ओंकारा आरती – सार (भावार्थ) “ॐ जय शिव ओंकारा” भगवान शिव की सबसे प्रसिद्ध और अर्थपूर्ण आरतियों …
शनिवार को त्रयोदशी आने पर शनि प्रदोष व्रत किया जाता है। इसकी कथा में राजकुमार धर्मगुप्त को खोया हुआ राज्य, पद और …
शुक्रवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी शुक्र प्रदोष कहलाती है। कथा के अनुसार, एक धनिक पुत्र ने शुक्रास्त के समय पत्नी को …
त्रयोदशी यदि बृहस्पतिवार को हो, तो उसे बृहस्पति या गुरु प्रदोष कहते हैं। देवगुरु बृहस्पति के मार्गदर्शन में देवताओं ने वृत्रासुर नामक दैत्य के …