श्री गायत्री माता चालीसा – Shri Gayatri Mata Chalisa
श्री गायत्री माता चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह श्री गायत्री माता चालीसा माँ गायत्री को जगत जननी, वेदमाता …
आरती देवी-देवताओं की स्तुति और उपासना के लिए गाया जाने वाला एक पवित्र भक्ति गीत है। पूजा के समय भक्त दीपक की पवित्र ज्योति अर्पित करते हुए आरती गाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और दिव्य बन जाता है। “आरती” शब्द संस्कृत के “आरात्रिक” से निकला है, जिसका अर्थ है — अंधकार को दूर करके प्रकाश फैलाने वाली क्रिया। इसलिए आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
श्री गायत्री माता चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह श्री गायत्री माता चालीसा माँ गायत्री को जगत जननी, वेदमाता …
वामन देव की आरती – सार (भावार्थ) वामन देव की आरती भगवान विष्णु के पाँचवें अवतार – वामन अवतार की …
कूर्म भगवान की आरती – सार (भावार्थ) कूर्म भगवान की आरती भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार – कच्छप अवतार की …
वराह देव की आरती का – सार (भावार्थ) वराह देव की यह आरती भगवान विष्णु के तृतीय अवतार – श्री …
श्री दाऊजी महाराज आरती – सार (भावार्थ) यह आरती श्री बलदेव जी अर्थात दाऊजी महाराज के करुणामय, शक्तिशाली और भक्तवत्सल …
श्री कल्कि भगवान आरती – सार (भावार्थ) श्री कल्कि भगवान की यह आरती भविष्य में अवतरित होने वाले भगवान विष्णु …
श्री मायातीत विष्णु जी की आरती का – सार (भावार्थ) श्री मायातीत विष्णु जी की आरती, भगवान को जगत के …
यमुना माता की आरती का सार (भावार्थ) यमुना माता की आरती कालिंदी, हरिप्रिया और पावन नदी-देवी के रूप में उनकी …
नैना देवी जी की आरती का – सार (भावार्थ) नैना देवी जी की आरती, माँ के अद्भुत, अलौकिक और करुणामय …
बाबोसा भगवान को भक्तजन भगवान हनुमान का ही एक दिव्य रूप या अवतार मानते हैं, जो कलियुग में अपने भक्तों …