गौमाता की आरती – Gau Mata Aarti
गौमाता की आरती – सार (भावार्थ) गौमाता की आरती सनातन धर्म में गौ के उस दिव्य और मातृत्वपूर्ण स्वरूप की …
आरती देवी-देवताओं की स्तुति और उपासना के लिए गाया जाने वाला एक पवित्र भक्ति गीत है। पूजा के समय भक्त दीपक की पवित्र ज्योति अर्पित करते हुए आरती गाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय और दिव्य बन जाता है। “आरती” शब्द संस्कृत के “आरात्रिक” से निकला है, जिसका अर्थ है — अंधकार को दूर करके प्रकाश फैलाने वाली क्रिया। इसलिए आरती केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है।
गौमाता की आरती – सार (भावार्थ) गौमाता की आरती सनातन धर्म में गौ के उस दिव्य और मातृत्वपूर्ण स्वरूप की …
शीतला माता की आरती – सार (भावार्थ) शीतला माता की आरती देवी शीतला के उस करुणामय और कल्याणकारी स्वरूप का …
आरती श्री गायत्री जी की – सार (भावार्थ) श्री गायत्री जी की आरती ज्ञान, श्रद्धा और शुद्ध भक्ति का दिव्य …
गायत्री माता की आरती – सार (भावार्थ) गायत्री माता की आरती सनातन धर्म में उस परम शक्ति की वंदना है, …
तुलसी माता की आरती – सार (भावार्थ) तुलसी माता की आरती सनातन धर्म में पूजित उस पावन शक्ति की स्तुति …
ललिता माता की आरती – सार (भावार्थ) ललिता माता की आरती देवी श्री त्रिपुरेश्वरी के उस परम दिव्य स्वरूप की …
श्री पार्वती माता की आरती का सार (भावार्थ) पार्वती माता की आरती देवी के मातृत्व, शक्ति, करुणा और कल्याणकारी स्वरूप …
एकादशी माता जी की आरती का – सार (भावार्थ) एकादशी माता जी की आरती सनातन धर्म में व्रत, भक्ति और …
अहोई माता की आरती का – सार (भावार्थ) अहोई माता की आरती, माँ अहोई के मातृत्व, करुणा, संतान-सुख और गृह-कल्याण …
श्री गंगा जी की आरती – “जय जय भगीरथनन्दिनि” का सार (भावार्थ) श्री गंगा जी की आरती माँ गंगा की …