श्री दुर्गा चालीसा – Shri Durga Chalisa
श्री दुर्गा चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह श्री दुर्गा चालीसा माँ जगदम्बा भवानी की सर्वशक्तिमान, करुणामयी और सर्वव्यापक …
चालीसा शब्द की उत्पत्ति “चालीस” से हुई है, जिसका अर्थ संख्या 40 होता है। यह एक पवित्र भक्ति स्तुति है, जिसमें सामान्यतः 40 चौपाइयाँ होती हैं, जिनके माध्यम से किसी देवी-देवता की महिमा, गुणों और कृपा का वर्णन किया जाता है। प्रायः चालीसा के आरंभ और अंत में दोहे भी शामिल किए जाते हैं, जो स्तुति का परिचय और समापन प्रस्तुत करते हैं।
श्री दुर्गा चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह श्री दुर्गा चालीसा माँ जगदम्बा भवानी की सर्वशक्तिमान, करुणामयी और सर्वव्यापक …
श्री नृसिंह चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ श्री नृसिंह चालीसा का यह सार भगवान नृसिंह के दिव्य अवतार, उनके …
श्री कुबेर चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ श्री कुबेर चालीसा का यह सार भगवान कुबेर के स्वरूप, महिमा, पराक्रम, …
श्री रामदेव चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ श्री रामदेव चालीसा का आरंभ गुरु, गणेश और देव कृपा के स्मरण …
श्री गिरिराज चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ प्रारंभिक भाव और विनय- श्री गिरिराज चालीसा की शुरुआत में भक्त गणपति, …
श्री बालाजी चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ श्री बालाजी चालीसा का आरंभ गुरु चरणों के ध्यान और हनुमान जी …
श्री परशुराम चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ श्री परशुराम चालीसा के प्रारंभ में भक्त सबसे पहले गुरु चरणों, गणपति, …
श्री विश्वकर्मा चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री विश्वकर्मा चालीसा सृष्टि के महान शिल्पकार, देवताओं के वास्तुकार …
श्री नवग्रह चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री नवग्रह चालीसा नवग्रहों — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, …
श्री भैरव चालीसा का विस्तृत सार एवं भावार्थ यह पावन श्री भैरव चालीसा भगवान श्री भैरव के उग्र, रक्षक, कालस्वरूप …