गायत्री माता की आरती – सार (भावार्थ)
गायत्री माता की आरती सनातन धर्म में उस परम शक्ति की वंदना है, जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। यह आरती गायत्री माता को आदि शक्ति, ब्रह्म स्वरूपिणी और सत् मार्ग की प्रेरक के रूप में स्थापित करती है। इसका मूल भाव मानव जीवन को शुद्ध, संयमित और आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाना है।
आरती की शुरुआत गायत्री माता की जय-जयकार से होती है और उनसे प्रार्थना की जाती है कि वे हमें सत्य के मार्ग पर चलाएँ, क्योंकि वही मार्ग सच्चे सुख और कल्याण का आधार है। यहाँ गायत्री माता को जीवन की दिशा देने वाली मार्गदर्शक शक्ति माना गया है।
आगे उन्हें आदि शक्ति, अलख और निरंजन कहा गया है—जो सृष्टि का पालन करने वाली हैं और समस्त दुख, शोक, भय, कलह, दारिद्र्य तथा दैन्य को दूर करने वाली हैं। यह पंक्तियाँ माता के करुणामय और रक्षक स्वरूप को उजागर करती हैं, जो भक्तों के कष्टों का निवारण करती हैं।
आरती में गायत्री माता को ब्रह्म रूपिणी और जगतधात्री अम्बे कहा गया है, जो सम्पूर्ण संसार को धारण करने वाली हैं। वे भव-भय को हरने वाली, जनकल्याण करने वाली और सुख प्रदान करने वाली जगदम्बा हैं। उनका स्वरूप ज्ञान, शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम है।
अगले चरण में माता के गुणों का विस्तार से वर्णन है—वे भयहारिणी, भवतारिणी, निष्पाप, अजन्मा और आनंद की राशि हैं। वे विकारों से रहित, पापों का नाश करने वाली, अचल, निर्मल और अविनाशी हैं। यह माता के शाश्वत और अपरिवर्तनीय स्वरूप को दर्शाता है।
आरती में गायत्री माता को कामधेनु, सत्-चित्-आनंद का साकार रूप और गंगा व गीता के समान पावन कहा गया है। वे सविता (सूर्य) की शाश्वत शक्ति हैं और सावित्री तथा सीता के रूप में आदर्श नारीत्व और तप की प्रतीक हैं।
वेदों और योगशास्त्र से उनका गहरा संबंध भी आरती में दर्शाया गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की प्रेरणा-शक्ति, प्रणव (ॐ) की महामहिमा, तथा कुण्डलिनी शक्ति, सुषुम्ना नाड़ी और सहस्रार चक्र की शोभा—ये सभी माता गायत्री की आध्यात्मिक गरिमा को प्रकट करते हैं।
आगे गायत्री माता को विभिन्न देवियों के रूपों में स्मरण किया गया है—स्वाहा, स्वधा, शची, ब्राह्मणी, राधा, रुद्राणी, वाणी, विद्या, कमला और कल्याणी—जो यह दर्शाता है कि वे समस्त देवशक्तियों की मूल स्रोत हैं।
भक्त अपने आप को दीन-हीन मानकर माता से करुणा की याचना करता है। यह भाव व्यक्त किया गया है कि चाहे हम दोषयुक्त हों, फिर भी माता के बालक हैं और उनकी शरण में हैं। माता से स्नेह, दया और संरक्षण की प्रार्थना की जाती है।
अंत में माता से विनती की जाती है कि वे काम, क्रोध, लोभ, अहंकार, दम्भ और द्वेष जैसे दुर्गुणों को दूर करें और हमारे मन को शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय और पवित्र विचारों से भर दें। माता समर्थ हैं—वे हर प्रकार से तारने वाली हैं और तुष्टि व पुष्टि प्रदान करने वाली हैं।
सार रूप में
गायत्री माता की यह आरती ज्ञान, साधना और आत्मशुद्धि का संपूर्ण संदेश देती है। इसका नियमित पाठ जीवन को सात्त्विक, विवेकपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है। यह आरती हमें सिखाती है कि सच्चा सुख केवल सत्य, संयम और सद्बुद्धि के मार्ग पर चलने से ही प्राप्त होता है।
जयति जय गायत्री माता! 🌼🙏
गायत्री माता की आरती – Gayatri Mata Ki Aarti
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता।
सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
आदि शक्ति तुम, अलख निरञ्जनजग पालन कर्त्री।
दुःख, शोक, भय, क्लेश,कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
ब्रह्म रुपिणी, प्रणत पालिनी, जगतधातृ अम्बे।
भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
भयहारिणि भवतारिणि अनघे, अज आनन्द राशी।
अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
कामधेनु सत् चित् आनन्दा, जय गंगा गीता।
सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
ऋग्, यजु, साम, अथर्व,प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे।
कुण्डलिनी सहस्रार,सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
स्वाहा, स्वधा, शची,ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी।
जय सतरुपा, वाणी, विद्या,कमला, कल्याणी॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
जननी हम है, दीन, हीन,दुःख, दरिद्र के घेरे।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत, तऊ बालक है तेरे॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
स्नेहसनी करुणामयि माता, चरण शरण दीजै।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
काम, क्रोध, मद, लोभ,दम्भ, दुर्भाव, द्वेष हरिये।
शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
तुम समर्थ सब भाँति तारिणी,तुष्टि, पुष्टि त्राता।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता॥
जयति जय गायत्री माता…..॥
गायत्री माता की आरती – जयति जय गायत्री माता का यह पावन सार यदि आपके मन को शांति, सद्बुद्धि और आत्मबल प्रदान करे, तो इसे अपने परिवारजनों और मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। माता गायत्री से जुड़ा आपका अनुभव, जप-साधना या श्रद्धाभाव नीचे कमेंट में लिखें—आपकी अनुभूति अन्य साधकों के लिए प्रेरणा बन सकती है। ऐसी ही गायत्री उपासना, आरती, मंत्र और सनातन धर्म से जुड़े दिव्य लेखों के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो / सब्सक्राइब करना न भूलें।
ॐ भूर्भुवः स्वः—जयति जय गायत्री माता! 🌼🙏