तुलसी माता की आरती – Tulsi Mata Ki Aarti

तुलसी माता की आरती – सार (भावार्थ)

तुलसी माता की आरती सनातन धर्म में पूजित उस पावन शक्ति की स्तुति है, जो शुद्धता, भक्ति, आरोग्य और मोक्ष का प्रतीक मानी जाती हैं। यह आरती तुलसी माता की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप और भगवान श्रीहरि विष्णु से उनके अटूट संबंध को सरल, भावपूर्ण और भक्तिमय शब्दों में प्रस्तुत करती है।

आरती की शुरुआत में तुलसी माता को सभी को सुख देने वाली वरदायिनी माता कहा गया है। वे अपने भक्तों के जीवन से दुख, कष्ट और अभाव को दूर कर सुख-शांति प्रदान करती हैं। उन्हें सभी योगों से श्रेष्ठ और सभी रोगों से रक्षा करने वाली शक्ति माना गया है। जो भी श्रद्धा से तुलसी माता की उपासना करता है, वह सांसारिक रोगों और भवसागर के दुखों से सुरक्षित रहता है।

आगे आरती में तुलसी माता के विभिन्न नामों और स्वरूपों का वर्णन मिलता है। उन्हें श्यामा, सूरवल्ली और ग्राम्या कहा गया है, जो उनके व्यापक और लोककल्याणकारी स्वरूप को दर्शाता है। तुलसी माता भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं और जो भक्त उनकी सेवा-पूजा करता है, वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर भवसागर को पार कर जाता है।

आरती में यह भी कहा गया है कि तुलसी माता श्रीहरि के मस्तक पर विराजमान रहती हैं और तीनों लोकों में पूजनीय हैं। वे विशेष रूप से पतित और दुखी जनों का उद्धार करने वाली मानी जाती हैं। उनके स्मरण मात्र से ही पापों का नाश होता है और जीवन पवित्रता की ओर अग्रसर होता है।

अगले चरण में तुलसी माता के पृथ्वी पर अवतरण की महिमा का वर्णन है। बताया गया है कि उन्होंने वन में जन्म लेकर भी दिव्य स्वरूप धारण किया और मानव लोक को सुख-समृद्धि का मार्ग दिखाया। उनके कारण ही गृहस्थ जीवन में सकारात्मकता, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

आरती के अंत में तुलसी माता को श्याम वर्ण, कोमल और सुकुमार बताया गया है। भगवान श्रीहरि विष्णु और तुलसी माता के बीच का प्रेम अत्यंत अद्भुत और दिव्य है। यह संबंध भक्ति, समर्पण और पवित्रता का सर्वोच्च उदाहरण है, जो भक्तों को निष्काम प्रेम और सच्ची आस्था का मार्ग सिखाता है।

सार रूप में

तुलसी माता की यह आरती भक्ति, आरोग्य, शुद्धता और मोक्ष का सार है। इसका नियमित पाठ घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति लाता है। तुलसी माता न केवल एक पवित्र पौधा हैं, बल्कि वे सनातन संस्कृति में जीवन को पवित्र और धर्ममय बनाने वाली दिव्य शक्ति हैं।
जय जय तुलसी माता! 🌿🙏

तुलसी माता की आरती – Tulsi Mata Ki Aarti

जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता।
सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,
रुज से रक्षा करके भव त्राता।

जय जय तुलसी माता।

बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या,
विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता।

जय जय तुलसी माता।

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,
पतित जनों की तारिणि, तुम हो विख्याता।

जय जय तुलसी माता।

लेकर जन्म बिजन में आई दिव्य भवन में,
मानव लोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता।

जय जय तुलसी माता।

हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी,
प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता।

जय जय तुलसी माता।


तुलसी माता की आरती का यह पावन सार यदि आपके मन को शांति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दे, तो इसे अपने परिवारजनों और मित्रों के साथ अवश्य शेयर करें। तुलसी माता से जुड़ी आपकी आस्था, अनुभव या घर में होने वाली पूजा-परंपराएँ नीचे कमेंट में लिखें—आपके शब्द अन्य भक्तों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

ऐसी ही तुलसी पूजा, आरती, व्रत-कथा और सनातन धर्म से जुड़े पावन लेखों के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो / सब्सक्राइब करना न भूलें।
जय जय तुलसी माता! 🌿🙏

Leave a Comment