यमुना माता की आरती – Yamuna Mata Aarti – ॐ जय यमुना माता

यमुना माता की आरती – सार (भावार्थ)

यमुना माता की आरती माँ यमुना के पावन, शीतल और मोक्षदायिनी स्वरूप का श्रद्धापूर्वक स्तवन है। इस आरती में यमुना माता को सुख-दुःख की दाता, पापहरिणी और भय नाशिनी के रूप में स्मरण किया गया है। उनके निर्मल जल में स्नान करने से मन, शरीर और आत्मा—तीनों की शुद्धि होती है तथा जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

आरती बताती है कि पवित्र यमुना जल सतत बहने वाली दिव्य धारा है, जो शरण में आए प्रत्येक भक्त का उद्धार करती है। जो जन श्रद्धा से यमुना माता की शरण ग्रहण करते हैं, उन्हें सांसारिक बंधनों से मुक्ति का मार्ग मिलता है। प्रातःकाल उठकर नियमित रूप से स्नान और ध्यान करने वाले भक्त यम के भय से मुक्त रहते हैं और आध्यात्मिक बल प्राप्त करते हैं।

कलियुग में भी यमुना माता की महिमा अटल बताई गई है। चारों वेदों में उनके महान महत्व का वर्णन है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यमुना केवल नदी नहीं, बल्कि सजीव देवी-तत्व हैं। उनके तट पर किए गए जप, तप और स्नान से जीवन पावन बनता है।

आरती में यह भी उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर अवतार लेकर लीलाएँ कीं। उनके निर्मल जल का पान कर कंस जैसे अत्याचारी का वध किया—यह संकेत देता है कि यमुना माता अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना में सहायक हैं।

अंततः, यमुना माता को भय हरणी और शुभ मंगल करणी कहा गया है। जब मन बेचैन हो और जीवन वैतरणी-सा कठिन प्रतीत हो, तब यमुना माता की भक्ति शांति, धैर्य और आश्वासन प्रदान करती है।

समग्र रूप से, यमुना माता की यह आरती भक्तों को पवित्रता, नियमित साधना, श्रद्धा और भक्ति का संदेश देती है। श्रद्धापूर्वक आरती करने से जीवन में कल्याण, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव होता है। 🙏

यमुना माता की आरती – Yamuna Mata Aarti

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।
जो नहावे फल पावे, सुख दुःख की दाता॥

ॐ जय यमुना माता…॥

पावन श्रीयमुना जलशीतल, अगम बहै धारा।
जो जन शरण में आया, कर दिया निस्तारा॥

ॐ जय यमुना माता…॥

जो जन प्रातः ही उठकर, नित्य स्नान करे।
यम के त्रास न पावे, जो नित्य ध्यान करे॥

ॐ जय यमुना माता…॥

कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही।
तुम्हारा बड़ा महातमचारों वेद कही॥

ॐ जय यमुना माता…॥

आन तुम्हारे माताप्रभु अवतार लियो।
नित्य निर्मल जल पीकरकंस को मार दियो॥

ॐ जय यमुना माता…॥

नमो मात भय हरणी, शुभ मन्गल करणी।
मन बेचैन भया है, तुम बिन वैतरणी॥

ॐ जय यमुना माता…॥

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता।
जो नहावे फल पावे, सुख दुःख की दाता॥

ॐ जय यमुना माता…॥


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