शीतला अष्टमी 2026: कब है? पूजा मुहूर्त, व्रत नियम और ठंडे भोजन की परंपरा

Table of Contents

1. शीतला अष्टमी क्या है?

शीतला अष्टमी का पर्व मां शीतला को समर्पित है, जिन्हें शीतलता प्रदान करने वाली देवी और रोगों की देवी के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व होली के ठीक 8 दिन बाद मनाया जाता है ।

हिंदू धर्म में इसका महत्व

हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जब देवी को बासी या ठंडा भोजन अर्पित किया जाता है । मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की विधिवत पूजा करने से परिवार को चेचक, दाद, खसरा और त्वचा संबंधी अन्य रोगों से रक्षा मिलती है ।

इसे बसोड़ा या बसोरा क्यों कहा जाता है?

इस पर्व को ‘बसोड़ा’ या ‘बसौड़ा’ भी कहा जाता है। यह नाम ‘बासी’ शब्द से लिया गया है। चूंकि इस दिन माता को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और भक्त भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए इसे बसोड़ा कहा जाता है ।

2. शीतला अष्टमी कब मनाई जाती है?

तिथि और समय (शीतला अष्टमी 2026)

शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी ।

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च 2026, रात 01:54 बजे

  • अष्टमी तिथि समाप्त: 12 मार्च 2026, सुबह 04:19 बजे

  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 06:36 बजे से शाम 06:27 बजे तक

चैत्र कृष्ण अष्टमी का महत्व

यह पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है । यह तिथि गर्मियों की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है ।

अलग-अलग राज्यों में परंपरा

यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है:

  • उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और गुजरात में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है ।

  • गुजरात में इसे ‘शीतला सातम’ के नाम से भी जाना जाता है ।

3. शीतला माता कौन हैं?

शीतला माता का स्वरूप

मां शीतला का स्वरूप अत्यंत कल्याणकारी है। उनकी मूर्तियों और चित्रों में वे एक गर्दभ (गधे) पर सवार दिखाई देती हैं । उनके हाथों में कलश, सूप (सुप्पा/चौर), झाड़ू (बुहारी) और नीम के पत्ते होते हैं । उनके मस्तक पर सोने या चांदी का डेकचा (बर्तन) भी दिखाया जाता है।

शीतला माता को रोगों की देवी क्यों कहा जाता है?

‘शीतला’ का अर्थ होता है ‘शीतलता’। मान्यता है कि मां शीतला अपने भक्तों के शरीर की ज्वाला (बुखार) और पीड़ा को शांत करती हैं । उन्हें विशेष रूप से चेचक (माता), खसरा और हैजा जैसे रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना गया है ।

माता का वाहन और हाथों की वस्तुओं का महत्व

  • गर्दभ (गधा) वाहन: गधा धैर्य और सेवा का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि माता सबसे सरल और विनम्र भक्तों की भी सुनती हैं ।

  • झाड़ू (बुहारी): यह साफ-सफाई और स्वच्छता का प्रतीक है, जो रोगों से बचाव के लिए सबसे आवश्यक है ।

  • सूप (चौर/विनोइंग फैन): इससे भूसी अलग की जाती है। यह माता द्वारा रोगों के कीटाणुओं को शरीर से अलग करने का प्रतीक है ।

  • कलश: यह स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है ।

  • नीम के पत्ते: नीम में औषधीय गुण होते हैं और यह त्वचा रोगों में लाभकारी है ।

4. शीतला अष्टमी की पौराणिक कथा

शीतला माता से जुड़ी प्रसिद्ध कथा

प्राचीन काल में ज्वरासुर नामक एक भयंकर राक्षस था । उसने अपनी शक्ति से पूरी पृथ्वी पर तरह-तरह के रोग, बुखार और दुख फैला दिए। लोग बुरी तरह पीड़ित हो गए और उनकी चीख-पुकार से तीनों लोक हिल गए। सभी देवता परेशान हो गए और उसका वध करने में असमर्थ रहे। तब सभी ने मिलकर आदिशक्ति की स्तुति की।

देवताओं की प्रार्थना सुनकर आदिशक्ति ने शीतला माता के रूप में अवतार लिया। माता ने अपने गणों के साथ ज्वरासुर पर आक्रमण कर दिया। उन्होंने अपने प्रचंड प्रभाव से ज्वरासुर को परास्त कर दिया। जब ज्वरासुर ने आत्मसमर्पण किया, तो माता शीतला ने उसे वरदान दिया कि जो भी भक्त माता की पूजा करेगा और स्वच्छता का पालन करेगा, उसे ज्वरासुर कभी पीड़ित नहीं करेगा ।

शीतला अष्टमी की पौराणिक कथा

कथा का धार्मिक संदेश

इस कथा का मुख्य संदेश है कि रोगों पर विजय पाने के लिए दैवीय कृपा के साथ-साथ स्वच्छता भी आवश्यक है। माता ने ज्वरासुर को यह शर्त दी थी, जिससे यह सिद्ध होता है कि सफाई और स्वास्थ्य का सीधा संबंध है ।

5. शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व

इस दिन माता की पूजा क्यों की जाती है?

इस दिन माता शीतला की पूजा का मुख्य उद्देश्य रोगों से रक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना है । ऐसी मान्यता है कि मां शीतला की कृपा से परिवार में कोई भी संक्रामक रोग नहीं फैलता ।

परिवार और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा महत्व

विशेषकर महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखती हैं । उनका विश्वास है कि माता बच्चों को चेचक, खसरा जैसे रोगों से बचाती हैं ।

स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का विश्वास

यह पर्व स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। प्राचीन काल में जब चेचक जैसे रोगों का कोई टीका नहीं था, तब लोग मां शीतला की शरण में जाते थे । आज भी यह विश्वास उतना ही प्रबल है कि मां की कृपा से रोगों से बचा जा सकता है।

6. शीतला अष्टमी की पूजा विधि

शीतला अष्टमी की पूजा विधि

पूजा की तैयारी कैसे करें?

  • शीतला अष्टमी से एक दिन पहले (सप्तमी) घर की विशेष सफाई करें।

  • सप्तमी के दिन ही माता के लिए भोग की सभी वस्तुएं बना लें, क्योंकि अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता ।

  • पूजा स्थल को साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें।

पूजा में किन-किन वस्तुओं की आवश्यकता होती है?

  • मां शीतला की मूर्ति या चित्र

  • रोली, कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी

  • कलश में जल

  • मौली (कलावा)

  • फूल, विशेषकर गेंदा और गुड़हल

  • लाल चुनरी

  • धूप, दीपक, कपूर

  • मेहंदी और सिंदूर

  • नारियल और केला

  • भोग के लिए ठंडे व्यंजन (मीठे चावल, पूड़ी, हलवा, कढ़ी, पकोड़े, गुलगुले आदि)

पूजा करने की पूरी विधि (Step by step)

  1. प्रातः स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें ।

  2. अर्घ्य: सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें ।

  3. प्रतिमा स्थापना: पूजा स्थल पर चौकी रखकर मां शीतला की प्रतिमा स्थापित करें और लाल चुनरी अर्पित करें ।

  4. संकल्प: हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा करने का संकल्प लें।

  5. पंचोपचार पूजा:

    • माता को रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत चढ़ाएं ।

    • सिंदूर और मेहंदी अर्पित करें ।

    • फूल और माला चढ़ाएं ।

    • धूप और दीपक जलाकर आरती करें ।

  6. भोग अर्पित करें: माता को बासी या ठंडा भोजन का भोग लगाएं ।

  7. कथा पाठ: शीतला माता की व्रत कथा का पाठ करें या सुनें ।

  8. आरती और प्रार्थना: अंत में मां शीतला की आरती करें और परिवार की सुख-शांति व अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें ।

  9. प्रसाद वितरण: पूजा के बाद सभी को प्रसाद बांटें।

7. शीतला अष्टमी पर ठंडा भोजन (बसोड़ा) क्यों खाया जाता है?

इस परंपरा का कारण

शीतला अष्टमी पर ठंडा भोजन खाने की परंपरा के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  • धार्मिक कारण: मान्यता है कि मां शीतला को ठंडा भोजन अति प्रिय है। इसलिए उन्हें बासी या ठंडा भोग लगाने की परंपरा है ।

  • वैज्ञानिक कारण: गर्मियों की शुरुआत में शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को सुधारने के लिए ठंडा भोजन लाभकारी होता है। बासी चावल खाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है ।

पूजा में चढ़ाए जाने वाले व्यंजन

पूजा में मुख्य रूप से ये व्यंजन चढ़ाए जाते हैं:

  • मीठे चावल (ठंडे)

  • पूड़ी या पकौड़ी

  • हलवा (ठंडा)

  • कढ़ी (ठंडी)

  • गुलगुले

  • मालपुए

  • बेसन के पकोड़े

बासी भोजन के पीछे धार्मिक मान्यता

यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जब देवी को बासी भोजन चढ़ाया जाता है और भक्त भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं । इस दिन चूल्हा न जलाने की परंपरा भी इसी से जुड़ी है ।

8. शीतला अष्टमी के व्रत के नियम

व्रत कैसे रखा जाता है?

  • यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं रखती हैं, हालांकि पुरुष भी रख सकते हैं ।

  • कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, तो कुछ फलाहार व्रत। अधिकांश भक्त दिन में एक बार ठंडा भोजन ग्रहण करते हैं ।

व्रत में क्या करें और क्या नहीं करें?

✅ क्या करें:

  • व्रत का संकल्प लें।

  • पूरे दिन मां का ध्यान करें और भजन-कीर्तन करें।

  • जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें ।

  • सच्चे मन से माता से प्रार्थना करें।

❌ क्या न करें:

  • चूल्हा न जलाएं – शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा जलाना वर्जित है ।

  • तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन, मांस-मदिरा) का सेवन न करें ।

  • किसी से वाद-विवाद या कलह न करें ।

  • किसी के बारे में गलत न सोचें ।

व्रत का पारण कैसे करें?

  • व्रत का पारण अगले दिन (12 मार्च) प्रातःकाल पूजा-पाठ के बाद करें।

  • पारण से पहले मां शीतला का स्मरण करें और उनका आभार व्यक्त करें।

  • अब ठंडा भोजन (प्रसाद) ग्रहण कर व्रत खोलें।

9. शीतला माता की आरती और मंत्र

शीतला माता का मुख्य मंत्र

मंत्र: ॐ श्री शीतलायै नमः।

इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना लाभकारी माना जाता है।

शीतला माता की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता॥

ॐ जय शीतला माता…..॥

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर डोलावें, जगमग छवि छाता॥

ॐ जय शीतला माता…..॥

(संपूर्ण शीतला माता की आरती पढ़े)

जप करने का महत्व

मां के मंत्रों का जप करने से मन एकाग्र होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रोगों से भी मुक्ति मिलती है।

10. शीतला अष्टमी से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं

घर में आग न जलाने की परंपरा

शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता । ऐसा इसलिए है क्योंकि इस दिन माता को ठंडा भोजन चढ़ाया जाता है। यह परंपरा गर्मियों में आग से बचने और शरीर को ठंडक पहुंचाने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी जुड़ी है।

शीतला अष्टमी से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं

बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी मान्यताएं

यह व्रत विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है । मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से यह व्रत करती हैं, उनके बच्चे चेचक और खसरा जैसे रोगों से बचे रहते हैं ।

ग्रामीण और शहरी परंपराओं का अंतर

  • ग्रामीण क्षेत्रों में: यह पर्व अधिक धूमधाम से मनाया जाता है। गांवों में सामूहिक पूजा का आयोजन होता है, मेले लगते हैं और माता के भजन-कीर्तन होते हैं।

  • शहरी क्षेत्रों में: शहरों में लोग घरों में ही पूजा करते हैं। समय की कमी के कारण कुछ परंपराओं का निर्वाह सरल रूप में किया जाता है, लेकिन श्रद्धा दोनों जगह समान रहती है ।

11. शीतला अष्टमी का सामाजिक और स्वास्थ्य से संबंध

प्राचीन समय में रोगों से बचाव की मान्यता

प्राचीन काल में जब चिकित्सा सुविधाएं विकसित नहीं थीं, तब चेचक, खसरा जैसे रोग महामारी का रूप ले लेते थे । ऐसे में लोग मां शीतला की शरण में जाते थे और उनसे रक्षा की प्रार्थना करते थे। यह मान्यता मनोवैज्ञानिक रूप से सकारात्मक प्रभाव डालती थी और लोगों में रोगों से लड़ने का साहस मिलता था।

स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ा संदेश

शीतला अष्टमी का सबसे बड़ा संदेश है स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व । माता के हाथों में झाड़ू और नीम के पत्ते इस बात का प्रतीक हैं कि रोगों से बचने के लिए सफाई और औषधीय पौधों का ज्ञान कितना आवश्यक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए ।

बासी चावल के स्वास्थ्य लाभ:

  • यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है ।

  • पाचन में सहायक होता है और कब्ज से राहत दिलाता है ।

  • इसमें फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है ।

  • यह शरीर के अतिरिक्त ताप को नियंत्रित करता है ।

12. निष्कर्ष

शीतला अष्टमी का आध्यात्मिक महत्व

शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आस्था, स्वास्थ्य और स्वच्छता का संगम है। यह पर्व हमें सिखाता है कि ईश्वर में आस्था के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना और साफ-सफाई का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है । मां शीतला की पूजा हमें याद दिलाती है कि शरीर को स्वस्थ और निरोग रखना ही सबसे बड़ा धन है ।

आज के समय में इसकी प्रासंगिकता

आधुनिक युग में भी शीतला अष्टमी की प्रासंगिकता बनी हुई है। यह पर्व हमें कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • स्वच्छता की आदत: यह हमें नियमित रूप से साफ-सफाई रखने की प्रेरणा देता है ।

  • प्राकृतिक उपचार: नीम जैसे औषधीय पौधों के महत्व को याद दिलाता है ।

  • पारिवारिक एकता: परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से आपसी प्रेम बढ़ता है ।

  • सांस्कृतिक विरासत: यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है ।

इस प्रकार, शीतला अष्टमी का पर्व हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रहने का मार्ग दिखाता है। आइए, इस पवित्र अवसर पर मां शीतला से प्रार्थना करें कि वे हम सभी को निरोग रखें और हमारे जीवन में सुख-शांति बनाए रखें।

ॐ श्री शीतलायै नमः 🙏

13. (FAQs) शीतला अष्टमी 2026 – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न 1: शीतला अष्टमी क्या है?
उत्तर: शीतला अष्टमी मां शीतला को समर्पित पर्व है, जो चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसे ‘बसोड़ा’ या ‘बसौड़ा’ भी कहते हैं।

प्रश्न 2: शीतला अष्टमी 2026 कब है?
उत्तर: शीतला अष्टमी 2026 में 11 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 11 मार्च रात 01:54 बजे से 12 मार्च सुबह 04:19 बजे तक है।

प्रश्न 3: शीतला अष्टमी को बसोड़ा क्यों कहते हैं?
उत्तर: इस दिन मां शीतला को बासी या ठंडा भोजन चढ़ाया जाता है और भक्त भी बासी भोजन ग्रहण करते हैं, इसलिए इसे ‘बसोड़ा’ (बासी से बना) कहा जाता है।

प्रश्न 4: शीतला माता कौन हैं?
उत्तर: शीतला माता रोगों की देवी हैं, जो चेचक, दाद, खसरा जैसे रोगों से रक्षा करती हैं। इनका वाहन गर्दभ (गधा) है और ये झाड़ू, कलश, सूप और नीम धारण करती हैं।

प्रश्न 5: शीतला अष्टमी की पूजा विधि क्या है?
उत्तर: प्रातः स्नान कर मां शीतला की प्रतिमा स्थापित करें। रोली, चंदन, फूल, धूप-दीप से पूजा करें और माता को ठंडे भोजन का भोग लगाएं। अंत में आरती करें और कथा सुनें।

प्रश्न 6: शीतला अष्टमी पर क्या चढ़ाएं?
उत्तर: माता को ठंडे मीठे चावल, पूड़ी, हलवा, कढ़ी, गुलगुले, मालपुए, बेसन के पकोड़े और नीम के पत्ते चढ़ाए जाते हैं।

प्रश्न 7: शीतला अष्टमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाते?
उत्तर: इस दिन माता को ठंडा भोग चढ़ाने की परंपरा है, इसलिए चूल्हा नहीं जलाया जाता। यह गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी जुड़ा है।

प्रश्न 8: क्या शीतला अष्टमी का व्रत करना अनिवार्य है?
उत्तर: यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन श्रद्धालु विशेषकर महिलाएं संतान की सुरक्षा और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत करती हैं।

प्रश्न 9: शीतला अष्टमी के व्रत में क्या खाएं?
उत्तर: इस व्रत में एक बार ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं तो कुछ फलाहार करते हैं। मुख्य रूप से पूजा का प्रसाद ही ग्रहण किया जाता है।

प्रश्न 10: क्या शीतला अष्टमी पर बासी खाना खाना चाहिए?
उत्तर: हां, यह एकमात्र पर्व है जब बासी या ठंडा भोजन खाने की परंपरा है। बासी चावल शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं और गर्मियों में लाभकारी होते हैं।

प्रश्न 11: क्या गर्भवती महिलाएं शीतला अष्टमी का व्रत कर सकती हैं?
उत्तर: गर्भवती महिलाएं डॉक्टर की सलाह से हल्का फलाहार व्रत कर सकती हैं, लेकिन निर्जला व्रत से बचना चाहिए। शिशु के पोषण का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

प्रश्न 12: शीतला माता की कथा क्या है?
उत्तर: ज्वरासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों में रोग फैला दिए थे। मां शीतला ने उसका वध कर देवताओं और मनुष्यों को रोगों से मुक्ति दिलाई और वरदान दिया कि उनकी पूजा करने वालों को रोग नहीं सताएंगे।

प्रश्न 13: शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह पर्व स्वास्थ्य और स्वच्छता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन मां शीतला की पूजा से चेचक, दाद, खसरा जैसे रोगों से रक्षा होती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

प्रश्न 14: शीतला अष्टमी पर कौन-सी कथा सुननी चाहिए?
उत्तर: शीतला माता की व्रत कथा सुननी चाहिए, जिसमें ज्वरासुर वध और माता की महिमा का वर्णन है। यह कथा पूजा के बाद सुनने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है।

प्रश्न 15: शीतला माता के हाथों में क्या-क्या होता है?
उत्तर: मां शीतला के हाथों में कलश, सूप (चौर), झाड़ू (बुहारी) और नीम के पत्ते होते हैं। ये सभी स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं।

प्रश्न 16: शीतला माता का वाहन क्या है?
उत्तर: मां शीतला का वाहन गर्दभ (गधा) है। गधा धैर्य और सेवा का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि माता सबसे सरल भक्तों की भी सुनती हैं।

प्रश्न 17: क्या शीतला अष्टमी पर नीम के पत्ते खाने चाहिए?
उत्तर: हां, नीम के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और त्वचा रोगों से बचाव होता है।

प्रश्न 18: शीतला अष्टमी का स्वास्थ्य से क्या संबंध है?
उत्तर: यह पर्व स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। बासी चावल खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और नीम के पत्तों में औषधीय गुण होते हैं।

प्रश्न 19: क्या बासी चावल खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?
उत्तर: बासी चावल शरीर को ठंडक प्रदान करता है, पाचन में सहायक होता है और कब्ज से राहत दिलाता है। यह गर्मियों में विशेष रूप से लाभकारी होता है।

प्रश्न 20: शीतला अष्टमी पर झाड़ू का क्या महत्व है?
उत्तर: झाड़ू स्वच्छता का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि रोगों से बचने के लिए साफ-सफाई का पालन करना सबसे आवश्यक है।

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