माँ चंद्रघंटा की आरती – Chandraghanta Mata ki Aarti

माँ चंद्रघंटा की आरती का – सार (भावार्थ)

माँ चंद्रघंटा की आरती भक्त के हृदय से निकली श्रद्धा, विश्वास और रक्षा की कामना को प्रकट करती है। इस आरती में माँ चंद्रघंटा को सुख-धाम, वरदायिनी और संकट हरने वाली देवी के रूप में स्मरण किया गया है। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे उसके अधूरे कार्य पूर्ण करें और जीवन में सुख, शांति व सफलता प्रदान करें।

आरती में माँ चंद्रघंटा को चंद्रमा के समान शीतल और तेजस्वी बताया गया है, जिनकी कृपा से मन को शांति मिलती है और मानसिक अशांति दूर होती है। माँ को मन की स्वामिनी कहा गया है, जो भक्तों के भाव और पीड़ा को तुरंत समझ लेती हैं। वे अपने भक्तों को मनचाहा वर देने वाली और हर संकट में रक्षा करने वाली करुणामयी माता हैं।

इस आरती में यह भी बताया गया है कि बुधवार के दिन श्रद्धा पूर्वक माँ का ध्यान करने, घी का दीपक जलाने और सच्चे मन से विनय करने से विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त जब सिर झुकाकर माँ के सामने अपनी मनोकामना रखता है, तो माँ चंद्रघंटा उसकी आशाओं को अवश्य पूर्ण करती हैं।

आरती में माँ के कांचीपुर (कांचीपुरम्) धाम का उल्लेख है, जहाँ उनका विशेष निवास और महिमा मानी जाती है। कर्नाटक क्षेत्र में भी माँ चंद्रघंटा की पूजा और मान्यता का वर्णन किया गया है। अंत में भक्त माँ से विनम्र प्रार्थना करता है कि वे उसका नाम-स्मरण स्वीकार करें और हर प्रकार के भय, संकट और कष्ट से उसकी रक्षा करें।

कुल मिलाकर, यह आरती माँ चंद्रघंटा को शांति, साहस, रक्षा और शुभ फल प्रदान करने वाली देवी के रूप में स्थापित करती है। नियमित श्रद्धा और भक्ति से की गई यह आरती भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति का संचार करती है। माँ चंद्रघंटा की कृपा से भय का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

मां चंद्रघंटा की आरती – Chandraghanta Mata ki Aarti

जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे काम॥१॥

चन्द्र समाज तू शीतल दाती।
चन्द्र तेज किरणों में समाती॥२॥

मन की मालक मन भाती हो।
चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥३॥

सुन्दर भाव को लाने वाली।
हर संकट में बचाने वाली॥४॥

हर बुधवार को तुझे ध्याये।
सन्मुख घी की ज्योत जलाये॥५॥

श्रद्दा सहित तो विनय सुनाये।
मूर्ति चन्द्र आकार बनाये॥६॥

शीश झुका कहे मन की बाता।
पूर्ण आस करो जगत दाता॥७॥

काँचीपुर स्थान तुम्हारा।
कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥८॥

नाम तेरा रटूँ महारानी।
भक्त की रक्षा करो भवानी॥९॥


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