आरती कीजै हनुमान लला की: अर्थ, लाभ और सही पाठ विधि – विस्तृत मार्गदर्शिका

परिचय: जब भक्ति ही शक्ति बन जाए

“आरती कीजै हनुमान लला की” केवल एक प्रार्थना नहीं है। यह उस अद्भुत शक्ति का आह्वान है, जो श्रीराम के परम भक्त, पवनपुत्र हनुमान के रूप में अवतरित हुई। जब भी मैं इस आरती को गाता हूं, तो मुझे लगता है जैसे मैं सिर्फ हनुमान जी की स्तुति नहीं कर रहा, बल्कि उनके जीवन के उन पराक्रमी प्रसंगों को फिर से जी रहा हूं, जो हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति में कितनी अपार शक्ति होती है।

आरती के पहले ही श्लोक में उन्हें “दुष्ट दलन रघुनाथ कला की” कहा गया है। यानी वे स्वयं भगवान राम की दिव्य शक्ति के अवतार हैं। यह पंक्ति मुझे हमेशा विश्वास दिलाती है कि जो शक्ति राम में है, वही शक्ति हनुमान में भी है, और वही शक्ति उनके हर सच्चे भक्त में प्रवाहित हो सकती है।

आरती कीजै हनुमान लला की – Aarti Kije Hanuman Lala Ki Lyrics

आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरिवर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥
दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारि सिया सुधि लाए॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे।सियारामजी के काज सवारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥
पैठि पाताल तोरि जम-कारे।अहिरावण की भुजा उखारे॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥
सुर नर मुनि आरती उतारें।जय जय जय हनुमान उचारें॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

कंचन थार कपूर लौ छाई।आरती करत अंजना माई॥
जो हनुमानजी की आरती गावे।बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

आरती कीजै हनुमान लला की….

लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

आरती कीजै हनुमान लला की – सार (भावार्थ)

“आरती कीजै हनुमान लला की” भगवान श्री हनुमान जी की वीरता, भक्ति, पराक्रम और करुणा को उजागर करने वाली अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली आरती है। इस आरती के माध्यम से हनुमान जी को दुष्टों का संहार करने वाले, श्रीराम की शक्ति (रघुनाथ कला) के साक्षात स्वरूप के रूप में स्मरण किया गया है।

आरती की शुरुआत में बताया गया है कि हनुमान जी की आराधना से अधर्म, नकारात्मक शक्तियाँ और दुष्ट प्रवृत्तियाँ नष्ट हो जाती हैं। वे केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि श्रीराम की दिव्य शक्ति के अवतार हैं। जिनके बल से बड़े-से-बड़े पर्वत तक कांप उठते हैं और जिनकी शरण में आने वाले भक्तों के पास रोग, दोष और भय तक नहीं फटकते।

हनुमान जी को अंजनी माता का महाबलशाली पुत्र बताया गया है, जो सदा संतों और भक्तों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं। यह आरती यह संदेश देती है कि जो सच्चे मन से हनुमान जी को पुकारता है, वह कभी अकेला नहीं रहता—हनुमान जी हर संकट में उसके सहायक बनते हैं।

रामकाज के लिए हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम का सुंदर वर्णन किया गया है। श्रीराम द्वारा भेजे जाने पर उन्होंने लंका में प्रवेश कर माता सीता की खोज की, और उनकी सुधि लाकर प्रभु राम को आश्वस्त किया। विशाल समुद्र, गहरी खाई और ऊँचे दुर्ग भी पवनपुत्र हनुमान को रोक नहीं सके।

लंका दहन और असुरों के संहार का उल्लेख यह दर्शाता है कि हनुमान जी अधर्म के विनाशक और धर्म के रक्षक हैं। उन्होंने श्रीराम और माता सीता के कार्यों को सफल बनाया, जिससे संपूर्ण रामकथा में उनका योगदान अमूल्य सिद्ध होता है।

आरती में लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाने का प्रसंग हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा और अपार शक्ति को दर्शाता है। यह घटना यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति में असंभव भी संभव हो जाता है

अहिरावण वध का वर्णन हनुमान जी की अतुलनीय वीरता और साहस का प्रतीक है। पाताल लोक में प्रवेश कर यमद्वार को तोड़ना और अहिरावण का संहार करना यह दर्शाता है कि हनुमान जी मृत्यु के भय से भी परे हैं। उनकी बाईं भुजा से असुरों का नाश और दाहिनी भुजा से संतों का उद्धार होना, धर्म और अधर्म के संतुलन का स्पष्ट संदेश देता है।

आरती के अंत में देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि सभी हनुमान जी की आरती करते हुए उनकी जय-जयकार करते हैं। माता अंजना स्वयं कपूर और दीप से आरती करती हैं, जिससे यह भाव प्रकट होता है कि हनुमान जी पूरे ब्रह्मांड में पूजनीय हैं

अंतिम पंक्तियाँ यह विश्वास दिलाती हैं कि जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से हनुमान जी की आरती करता है, उसे वैकुण्ठधाम और परम पद की प्राप्ति होती है। अर्थात हनुमान जी की उपासना केवल सांसारिक संकटों से ही नहीं, बल्कि आत्मिक मुक्ति का भी मार्ग प्रशस्त करती है।

यह आरती हमें सिखाती है कि हनुमान जी भक्ति, शक्ति और सेवा का अद्भुत संगम हैं। उनकी आराधना से भय, रोग, शत्रु और विघ्न स्वतः नष्ट हो जाते हैं तथा जीवन में साहस, विश्वास और सफलता का संचार होता है।

आरती कीजै हनुमान लला की के चमत्कारी लाभ

मैंने इस आरती को नियमित रूप से करने के जो अद्भुत लाभ अनुभव किए हैं, उन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन फिर भी मैं अपने अनुभव साझा करने का प्रयास करूंगा:

🛡️ भय पर पूर्ण विजय:
आरती कहती है – “जाके बल से गिरिवर कांपे, रोग दोष जाके निकट न झांके”। यानी जिसके बल से पर्वत भी कांपते हैं, उसके पास रोग और दोष तो आते ही नहीं। मेरे जीवन में एक समय ऐसा आया जब मैं हर चीज से डरता था—असफलता से, बीमारी से, यहां तक कि अकेलेपन से भी। फिर मैंने प्रतिदिन यह आरती गाना शुरू किया। धीरे-धीरे मैंने महसूस किया कि डर ने मुझे छोड़ना शुरू कर दिया। यह आरती मुझे याद दिलाती है कि अगर हनुमान जी मेरे साथ हैं, तो डरने की कोई जरूरत नहीं।

🦋 मानसिक और शारीरिक रोगों से मुक्ति:
हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। “रोग दोष जाके निकट न झांके” पंक्ति पर मेरी गहरी आस्था है। मैंने कई लोगों को देखा है, जो लंबे समय से असाध्य रोगों से पीड़ित थे, उन्होंने जब नियमित रूप से यह आरती और हनुमान चालीसा का पाठ शुरू किया, तो उनके रोगों में आश्चर्यजनक कमी आई। यह कोई जादू नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का वैज्ञानिक प्रभाव है।

⚡ आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि:
“अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई” – जब मैं यह पंक्ति गाता हूं, तो मुझे लगता है कि अंजनी पुत्र की वही महा शक्ति मुझमें भी प्रवाहित हो रही है। आरती का हर शब्द मुझे उनके उन अद्भुत कार्यों की याद दिलाता है – समुद्र लांघना, लंका दहन, संजीवनी लाना। इससे मेरे अंदर यह विश्वास जागता है कि अगर वे यह कर सकते हैं, तो मैं भी अपने जीवन की छोटी-मोटी बाधाओं को पार कर सकता हूं।

🛡️ शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा:
“बाएं भुजा असुरदल मारे, दाहिने भुजा संतजन तारे” – यह पंक्ति बताती है कि हनुमान जी के एक हाथ से असुरों का संहार होता है और दूसरे से संतों का उद्धार। यानी जो भी उनकी शरण में आता है, वह सुरक्षित है। मैंने कई बार ऐसा महसूस किया है कि जब मैं इस आरती को गाता हूं, तो मेरे आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है और एक सुरक्षा कवच-सा बन जाता है।

आरती का सही समय और सही तरीका

संकटमोचन को प्रसन्न करने का कोई कठिन नियम नहीं है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखने से आपकी भक्ति और भी गहरी और फलदायी हो सकती है।

🕉️ कब करें आरती:

  • मंगलवार और शनिवार: ये दिन हनुमान जी को समर्पित हैं और इन दिनों इस आरती का विशेष महत्व है। इन दिनों व्रत रखकर आरती करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

  • प्रातःकाल (सूर्योदय से पहले): ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान जी की आरती करने से दिनभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और मन शांत रहता है।

  • सायंकाल (सूर्यास्त के समय): संध्या के समय, दीपक जलाकर आरती करना बहुत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय हनुमान जी अपने भक्तों के पास आते हैं।

  • संकट के समय: जब भी जीवन में कोई बड़ी समस्या आए, डर लगे या मुश्किल समय हो, तो बिना किसी संकोच के कभी भी यह आरती कर सकते हैं। हनुमान जी को ‘संकटमोचन’ इसीलिए कहा जाता है।

🙏 कैसे करें आरती (सरल विधि):

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। लाल या केसरिया रंग के वस्त्र हनुमान जी को प्रिय हैं।

  2. हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। यदि मूर्ति न हो तो केवल उनकी तस्वीर भी रख सकते हैं।

  3. उन्हें लाल फूल, चमेली का तेल या लाल चंदन अर्पित करें। बेसन के लड्डू या चने का भोग लगाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

  4. सिंदूर या रोली से उनका तिलक करें। गुड़ या लाल मिठाई का भी भोग लगा सकते हैं।

  5. घी या कपूर का दीपक जलाएं। लाल रंग की धूप या अगरबत्ती का प्रयोग करें।

  6. अब श्रद्धा और प्रेम के साथ, धीरे-धीरे आरती का पाठ करें या गाएं। हर शब्द के अर्थ को महसूस करें, जैसे आप स्वयं उनके उन पराक्रमों के साक्षी हों।

  7. आरती के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत अच्छा होता है। अंत में सभी से क्षमा याचना करें और प्रसाद बांटें।

धार्मिक महत्व: हर पंक्ति है एक कथा

यह आरती हनुमान जी के जीवन के प्रमुख घटनाओं का संक्षिप्त लेकिन अत्यंत सशक्त वर्णन है। इसे समझना यानी उनके चरित्र को समझना।

  • ‘दुष्ट दलन रघुनाथ कला की’: इसका अर्थ है कि हनुमान जी स्वयं भगवान राम की शक्ति हैं। राम जहां मर्यादा और धर्म के प्रतीक हैं, वहीं हनुमान उस धर्म की रक्षा के लिए उठा हुआ वह पराक्रमी हाथ हैं, जो दुष्टों का दलन करता है।

  • ‘लंका सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई’: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो कोई भी बाधा इतनी बड़ी नहीं होती जिसे पार न किया जा सके। हनुमान जी के लिए समुद्र जैसी विशाल बाधा भी कुछ नहीं थी।

  • ‘लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, आनि संजीवन प्राण उबारे’: यह घटना सेवा और करुणा का अद्भुत उदाहरण है। बिना किसी स्वार्थ के, केवल अपने प्रभु के भाई को बचाने के लिए उन्होंने पर्वत ही उठा लिया। यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति में सेवा ही सर्वोपरि है।

  • ‘बाएं भुजा असुरदल मारे, दाहिने भुजा संतजन तारे’: यह दर्शाता है कि हनुमान जी में दोहरी शक्ति है – एक तरफ वे बुराई का नाश करते हैं, तो दूसरी तरफ अच्छाई की रक्षा। वे संतुलन के देवता हैं।

  • ‘कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई’: यह अंतिम पंक्ति बहुत भावुक कर देने वाली है। इसमें माता अंजना स्वयं अपने पुत्र की आरती करती हैं। यह दर्शाता है कि हनुमान जी इतने पूजनीय हैं कि उनकी अपनी माता भी उनकी आरती करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. प्रश्न: क्या इस आरती को रोज करना आवश्यक है?
    उत्तर: आवश्यक नहीं, लेकिन अत्यंत लाभकारी है। यदि रोज न कर सकें तो मंगलवार और शनिवार को अवश्य करें। नियमितता से हनुमान जी की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  2. प्रश्न: क्या महिलाएं हनुमान जी की यह आरती कर सकती हैं?
    उत्तर: बिल्कुल कर सकती हैं। यह एक गलत धारणा है कि महिलाएं हनुमान जी की पूजा नहीं कर सकतीं। हनुमान जी तो सबके संकटमोचन हैं, चाहे भक्त स्त्री हो या पुरुष। माता अंजना स्वयं स्त्री थीं और उन्होंने अपने पुत्र की आरती की।
  3. प्रश्न: क्या बिना मूर्ति या तस्वीर के केवल मानसिक रूप से आरती करने से भी लाभ मिलता है?
    उत्तर: अवश्य। हनुमान जी तो हृदय में वास करते हैं। यदि आपके पास कोई चित्र या मूर्ति नहीं है, तो अपने मन में ही उनके लाल मुख वाले, भक्त-वत्सल स्वरूप का ध्यान करें और आरती गाएं। आपका भाव ही सबसे महत्वपूर्ण है।
  4. प्रश्न: आरती के बाद क्या करना चाहिए?
    उत्तर: आरती के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत अच्छा होता है। आप ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का भी जाप कर सकते हैं। प्रसाद सभी में बांटें और अपने मन की इच्छा हनुमान जी से कहें।
  5. प्रश्न: अगर मुझे आरती के शब्द याद नहीं हैं तो क्या करूं?
    उत्तर: आप मोबाइल या किताब में देखकर भी आरती पढ़ सकते हैं। हनुमान जी को शब्दों से मतलब नहीं, भाव से मतलब है। सच्चे मन से पढ़ी गई एक पंक्ति भी उन तक पहुंच जाती है।

निष्कर्ष: बजरंगबली की शरण में

तो यह है ‘आरती कीजै हनुमान लला की’ की अमृतमयी आरती। यह आरती मुझे सिखाती है कि भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना या माला फेरना नहीं है। भक्ति का अर्थ है हनुमान जी की तरह निर्भीक होना, उनकी तरह सेवा में समर्पित होना, और उनकी तरह अपने प्रभु के प्रति अटूट विश्वास रखना।

जब भी जीवन की राह में कोई समुद्र आड़े आए, कोई लंका जलाने की जरूरत हो, या किसी मूर्छित लक्ष्मण को बचाना हो, तो बस एक बार सच्चे मन से इस आरती को गुनगुनाएं। आप पाएंगे कि आपके अंदर वही शक्ति जाग उठी है, जिसने समुद्र लांघा था। वही विश्वास जाग उठा है, जिसने संजीवनी बूटी उठा लाई थी।

जय बजरंगबली! जय श्री राम!

आपको यह आरती कैसी लगी? क्या इसका कोई अंश आपके दिल को छू गया? कृपया नीचे कमेंट में “जय बजरंगबली” लिखकर अपनी श्रद्धा और अनुभव अवश्य साझा करें। आपके विचार ही हमें ऐसी और भक्ति सामग्री लाने के लिए प्रेरित करते हैं। इस आरती को अपने मित्रों और परिवार के साथ भी साझा करें, ताकि वे भी बजरंगबली की असीम कृपा का अनुभव कर सकें।

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प्रसिद्ध “ आरती कीजै हनुमान लला की ” – वीडियो :


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