महागौरी माता की आरती – Mahagauri Mata Ki Aarti

महागौरी माता की आरती का – सार (भावार्थ)

महागौरी माता की आरती माँ दुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी की महिमा, करुणा और शुद्ध शक्ति का सुंदर वर्णन करती है। आरती में माँ को जगत की माया, उमा, भवानी और महामाया कहा गया है, जो संपूर्ण सृष्टि का संचालन करती हैं और भक्तों के जीवन से अज्ञान व दुःख का नाश करती हैं।

इस आरती के अनुसार माँ महागौरी का निवास हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में माना गया है, जो अत्यंत पावन और सिद्ध स्थल है। माँ को चन्द्रकली के समान शीतल, ममतामयी और करुणामयी बताया गया है, जिनकी कृपा से भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है। वे जगदम्बा और आदिशक्ति के रूप में समस्त शक्तियों की मूल आधार हैं।

आरती में माँ के विभिन्न स्वरूपों—भीमा देवी, विमला माता और कौशिक देवी—का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि माँ एक होकर भी अनेक रूपों में भक्तों की रक्षा करती हैं। हिमाचल पर्वत के घर जन्म लेकर उन्होंने गौरी रूप धारण किया और समय के अनुसार महाकाली व दुर्गा जैसे उग्र रूपों में भी अधर्म का नाश किया।

सती माता के हवन कुण्ड में प्रवेश की कथा के माध्यम से यह बताया गया है कि उसी अग्नि और धुएँ से माँ काली का प्राकट्य हुआ, और कालांतर में वही शक्ति शुद्ध होकर महागौरी के रूप में प्रकट हुई। यह रूप शुद्धता, तप, क्षमा और मोक्ष का प्रतीक है।

आरती में यह भी वर्णित है कि जब अधर्म बढ़ा, तब भगवान शिव ने अपने त्रिशूल के द्वारा धर्म की रक्षा की और माँ ने महागौरी नाम से भक्तों के कष्टों का निवारण किया। जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसके जीवन के संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।

विशेष रूप से शनिवार के दिन माँ महागौरी की पूजा का महत्व बताया गया है। श्रद्धा और नियम से उनकी आराधना करने पर बिगड़े हुए कार्य सुधर जाते हैं और जीवन में शुभता, सफलता व संतुलन आता है।

समग्र रूप से यह आरती माँ महागौरी को शुद्धता, शक्ति, करुणा और विजय की देवी के रूप में प्रस्तुत करती है, जिनका स्मरण मात्र से मन निर्मल होता है और जीवन धर्ममय बनता है।

महागौरी माता की आरती – Mahagauri Mata Ki Aarti

जय महागौरी जगत की माया।
जय उमा भवानी जय महामाया॥१॥

हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहा निवासा॥२॥

चन्द्रकली और ममता अम्बे।
जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥३॥

भीमा देवी विमला माता।
कौशिक देवी जग विख्यता॥४॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥५॥

सती (सत) हवन कुण्ड में था जलाया।
उसी धुयें ने रूप काली बनाया॥६॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥७॥

तभी माँ ने महागौरी नाम पाया।
शरण आने वाले का संकट मिटाया॥८॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥९॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥१०॥


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जय माँ महागौरी! 🌸

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